
पिछले 11 सालों से जिस विकास का दावा भाजपा कर रही थी, उस विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने से वह बच रही है, तो इसका कारण भी स्पष्ट है। नीति आयोग की रिपोर्ट (2021) बताती है कि बिहार में आज 6.50 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी में जी रहे हैं, 6.58 करोड़ लोग कुपोषित हैं, जिनमें 43.9% बच्चे और 60.3% महिलाएँ भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के अनुसार, 2022 में भारत का मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) का औसत स्कोर 0.644 था, जबकि बिहार का 0.609 था। इन आँकड़ों में देश के 29 राज्यों की सूची में बिहार सबसे निचले पायदान पर खड़ा है।
यहां 41% महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी शादी 18 वर्ष से कम उम्र में हो गयी थी। इस मानदंड पर बिहार 28वें स्थान पर है। बिहारी महिलाओं की यह स्थिति बच्चों के सेहत को भी प्रभावित करती है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, जहाँ भारत की शिशु मृत्यु दर (प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर) 35.2 है, वहीं बिहार 46.8 की दर के साथ 27वें स्थान पर है। उम्र के लिहाज से छोटे क़द वाले सबसे ज्यादा 42.9% बच्चों के साथ 27वें और क़द के हिसाब से कम वजन वाले बच्चों के मामले में 22.9% के साथ बिहार अंतिम 29वें स्थान पर खड़ा है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 9वीं-10वीं कक्षा में स्कूल छोड़ देने वाले (ड्रॉपआउट) बच्चों के मामले में भी बिहार 20.5% के साथ 27वें स्थान पर और 11वीं-12वीं कक्षा में कुल नामांकन अनुपात मात्र 35.9% के साथ बिहार 28वें पायदान पर खड़ा है। स्कूली शिक्षा पूरी करने वाले केवल 17.1% बच्चे ही कॉलेज शिक्षा में प्रवेश ले पाते हैं, और वह 28वीं पायदान पर है। बिहार में केवल 14.6% परिवार (अंतिम 29वां स्थान) ही ऐसे हैं, जिन्हें स्वास्थ्य बीमा की किसी योजना का लाभ मिलता है।
बिहार में सुशासन के हाल का पता चुनाव प्रचार के दौरान लगातार हो रही हिंसा से ही चल जाता है। पकौड़ा तलने के बाद अब रील बनाकर रोजगार पाने के सपने बिहारी युवाओं को भाजपा दिखा रही है। यह बताता है कि भाजपा के पास न मुद्दे हैं और न उपलब्धियां। इसलिए, अब विपक्ष के गठबंधन के पास चुनाव के बहाने वह पूरे देश की आम जनता को संबोधित करने का भी अवसर है।
लोकसभा में इंडिया ब्लॉक की एकजुटता ने भाजपा को स्पष्ट बहुमत हासिल करने से वंचित कर दिया था। इससे देश की विपक्षी ताकतों में उत्साह का जो संचार हुआ था, उस लहर को महाराष्ट्र और दूसरे राज्यों में नियोजित धांधली के जरिए भाजपाई खेमे ने ठंडा कर दिया था। अब बिहार चुनाव फिर से इंडिया ब्लॉक को राष्ट्रीय स्तर पर उभरने का मौका दे रहा है, बशर्ते कांग्रेस अपने पार्टीगत हितों पर बिहार की गरीब जनता के हितों को तवज्जो दे। नीतीश का भविष्य मोदी ने तय कर दिया है। इंडिया ब्लॉक का भविष्य वाया महागठबंधन बिहार की आम जनता तय करेगी उसकी एकजुटता और आचरण को देखकर। फिलहाल, कयास लगाने के लिए पूरे दो सप्ताह बाकी हैं।
(लेखक अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ़ किसान सभा के उपाध्यक्ष हैं। संपर्क : 94242-31650)