भक्तों के मन में आतुरता का भाव देख भगवान दौड़े चले आते हैं— पंडित आदित्य मुखिया जी
बुरहानपुर — भगवान भक्तों का भाव है और भक्तों के चरित्र में जब यह भाव आता हैं और इस भाव में ईश्वर निहित है प्रभु भक्तों के मन में ईश्वर के दर्शन हो इसके पहले उसके मन में प्रभु दर्शन की आतुरता पैदा होना चाहिए भक्त की आतुरता प्रकट करने के बाद ईश्वर स्वयं आकर दर्शन देते हैं
संतभ की तरह सीधे और सरल होने वाले भक्तों के अंदर ईश्वर का वास होता है जो धर्म को टिकाये रकता है वही स्तंभ है । इसी सतंभ में ईश्वर है वहां रूप और धन के भूखे नहीं है वह केवल भाव के भूखे हैं जो प्रेम से स्मरण करता है वही भक्त प्रहलाद की तरह होते है
जहां राम होते हैं वहां काम नहीं रहता यह विचार भागवत कथा के चतुर्थ दिवस प्रवचन के दौरान आदित्य मुखिया जी ने प्रकट करते हुए कहा एक समय में 60 सेकंड से लेकर एक मन मंतर समय की गणना करते हुए के कल्पतक की गणना करते हुए एक दिवस की जानकारी दी
आपने बताया कि प्रथम अध्याय मे गज मोक्ष की कथा बताते हुए कहा कि जब गजेंद्र ने जल पुष्प कमल तोड़कर प्रभु के चरणों में अर्पित कर भगवान विष्णु को पुकारा था तब नग्न पैर गए को बचाने दौड़े चले आए और मगरमच्छ से गंज की रक्षा की इसी प्रकार द्रोपदी ने चीर हरण के समय परिवार की चिंता छोड़कर प्रभु की पुकार की तब प्रभु ने उसकी लाज बचाई भगवान भक्त वत्सल है भगवान भक्तों की पुकार पर तुरंत दौड़े चले आते हैं वैष्णव को गीता का अध्याय विष्णु सहस्त्र नाम रामायण सहस्त्र पांच रत्नों का अध्ययन करना चाहिए भगवान के रंग बताते हुए कहां ब्रह्मा का रंग लाल विष्णु का रंग नीला जब महादेव कालकूट जहर पी रहे थे तब उन्होंने विष्णु का नाम स्मरण किया इससे शिव का कंठ नीला हुआ और इसे नील कंठेश्वर कहलाए गए अपने भगवान के वामन अवतार और विराट अवतार की कथा सुनाई
आज का प्रमुख आकर्षण वामन भगवान का पूजन निगम महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल एवं पूर्व महापौर अतुल पटेल ने किया
100 अश्वमेध यज्ञ करने वाला यज्ञ स्वर्ग का अधिकारी हो जाता है
श्रोता में प्रमुख यजमान श्रीमती माधुरी अतुल पटेल कथा संयोजक अतुल पटेल,अजय नटवरलाल,महेंद्र पारीक,राजेंद्र भाई जालान पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह, लक्ष्मीपोद्दार रश्मि देवड़ा, प्रमोद गढ़वाल,कैलाश शर्मा,महेंद्र पोद्दार,मुकेश डालमिया महेश जोशी, लोकराम गोयल,विजय गुप्ता पवन लाड़ प्रमोद जी , जिला पंचायत अध्यक्ष गंगाराम मार्को, रामावतार फौजदार धीरेंद्र सिंह सिकरवार,सुरेंद्र बिड़ला गोकुल चंद्रमां के सेवक प्रमोद लाल, विनोद लाड़ आदि उपस्थित थे कथा समापन के बाद ग्रन्थ की आरती कर महा प्रसादी का वितरण किया गया।