मकर संक्रांति पर्व पर भाजपा युवा नेता गजेंद्र पाटील ने “संस्कृति बचाओ मंच” के माध्यम से की सार्थक पहल।
पारंपरिक तरीके से सुता मांजा चाईनीज मांजे से दूर रहने का दिया संदेश।
बुरहानपुर। पतंग उत्सव सूर्य के उत्तरायण का स्वागत करता है आपसी भाईचारे, उत्साह और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बच्चों व युवाओं में रचनात्मकता और प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ाता है यह पर्व फसल कटाई से जुड़ा है किसानों के लिए नई शुरुआत व समृद्धि का प्रतीक है मकर संक्राति तिल गुड़ की मिठास के साथ-साथ पतंगबाजी के उत्साह से भरा पर्व है। लेकिन पतंगबाजी के पेंच लड़ाकर, हर पल रोमांच और अनगिनत खुशियों से भर देने वाला यही पर्व एक ही पल में आपसे सारी खुशियां छीन भी सकता है। क्योंकि पतंग उड़ाने के लिए आप जिस चाईनीज मांझे का इस्तेमाल करते हैं, वह बेहद खतरनाक भी हो सकता है।
यह बात मंच संयोजक गजेंद्र पाटील ने देशी मांझा अपने हाथों से सुतकर एक संदेश के तौर पर युवाओं को दी। उन्होंने कहा कि पहले कच्चे धागे से पारंपरिक तरीके से जो मांझा सूता जाता था वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचता था। जबकि आजकल का चाइनीज मांझा लोगों की जान तक ले रहा है यही नहीं पशु पक्षी भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।
चाइनीज मांजे से रहे दूर
गजेंद्र पाटील ने पतंग उड़ाने वाले आम जनमानस व युवाओं से अपील करते हुए कहा कि संक्रांति के पहले ही बाजार रंगबिरंगी, छोटी-बड़ी, विभिन्न आकार की पतंगों से सज जाता है। इनमें से आप अपने मुताबिक कोई भी पतंग चुन सकते हैं, लेकिन इसे उड़ाने के लिए आप जिस मांझे, यानि पतंग उड़ाने वाली डोर का प्रयोग कर रहे हैं उससे सावधान हो जाएं। यह डोर न केवल आपको बुरी तरह से घायल कर सकती है, बल्कि संक्रांति पर पतंग की यह सुनहरी डोर, आपसे आपकी या अपनों की जिंदगी भी छीन सकती है।
आजकल बाजार में चाइना की बनी पतंगें और मांझे की खूब बिक्री हो रही है। लेकिन दिखने में आकर्षक और मजबूत मांझा आपको बुरी तरह से घायल कर सकता है।इसलिए देशी व पारंपरिक तरीके से बने मांजे का उपयोग करें।
मंच के अमोल भगत गणेश पाटिल भारत मराठे भरत इंगले नितेश दलाल राजेश महाजन सुमित वारुडे अनिमेष चौहान गज्जू महाजन पवन चौहान आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।