“जल–जंगल–जमीन हमारी पहचान” : 33वें राष्ट्रीय आदिवासी महासम्मेलन में विधायक मंजू दादू की हुंकार

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नेपानगर विधायक सुश्री मंजू राजेंद्र दादू ने 33वा राष्ट्रीय आदिवासी महासम्मेलन में की सहभागिता।

 

 

नेपानगर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम चेनपुरा में 33वे आदिवासी महासम्मेलन का आज से तीन दिवसीय कार्यक्रम का शुभारंभ के अवसर पर क्षेत्रीय विधायक सुश्री मंजू राजेंद्र दादू ने शामिल होकर समाजनो के मध्य अपनी बात सांझा की। विधायक ने कहा कि आज हम यहाँ केवल एक समाज के रूप में नहीं, बल्कि इस धरती के ‘मूल मालिकों’ के रूप में एकत्रित हुए हैं। आदिम संस्कृति वह नींव है जिस पर मानवता का महल खड़ा है। जब दुनिया पर्यावरण बचाने के तरीके ढूंढ रही थी, तब मेरा आदिवासी समाज सदियों से जल, जंगल और ज़मीन की पूजा कर उनका संरक्षण कर रहा था।

हमारा इतिहास बिरसा मुंडा के उलगुलान, टंट्या भील के साहस और रानी दुर्गावती के बलिदान से लिखा गया है। आज समय है कि हम अपनी उस विरासत को आधुनिक शिक्षा और अधिकारों के साथ जोड़ें। हमारे समाज में महिलाओं का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है। वे न केवल अपने परिवार की धुरी होती हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान की संरक्षक भी मानी जाती हैं। आज जनजातीय महिलाएं देश के सर्वोच्च पदों से लेकर खेल के मैदान तक अपनी छाप छोड़ रही हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि हमें अवसर मिले, तो हम आसमान छू सकते हैं। उठो, पढ़ो और अपने समाज का नेतृत्व करो!” जनजातीय महिलाएं खेती, वनोपज (जैसे महुआ, तेंदू पत्ता इकट्ठा करना) और हस्तशिल्प के माध्यम से परिवार की अर्थव्यवस्था में बराबर का योगदान देती हैं। वे हाट-बाजारों में व्यापार का प्रबंधन स्वयं कर रही हैं। विधायक ने कार्यक्रम स्थल पर भोजन, स्वास्थ्य, सुरक्षा, यातायात विद्युत, पेय जल आदि व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

 

महासम्मेलन में क्षेत्रीय जनजातीय ग्रामीणों के साथ- साथ अन्य राज्यों से उपस्थित समाजजन में उपस्थित रहे।

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