झोपड़ी में पढ़ाई, न पानी न रास्ता: बोमालिया पाठ की आंगनवाड़ी बदहाली की मार झेलते नौनिहाल

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अजब एमपी गजब शिक्षा

आजादी के 78 साल बाद भी झोपड़ी में लग रही आंगनवाड़ी।

 

आपको बता दे की बुरहानपुर जिले से 60 किलोमीटर दूर स्थित बोमालिया पाठ में 2017 से झोपड़ी में आंगनवाड़ी लग रही है।

न जाने का रास्ता न पीने के पानी की व्यवस्था,

झोपड़ी में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल।

एक और देश के प्रधानमंत्री प्रदेश के मुख्यमंत्री शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं।

लेकिन स्थानीय शासन प्रशासन का इस गरीब अंचलों में आदिवासी फलियां में ध्यान नहीं है।

कार्यकर्ता ने बताया कि मुझे अभी 5 वर्ष आंगनवाड़ी ज्वाइन करने में हो रहे हैं, तब से मैं झोपड़ी में ही आंगनबाड़ी लग रही हूं, सरपंच सचिव एवं आला अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद भी भवन निर्माण नहीं हो पाया।

5 वर्षों से अधूरा पड़ा आंगनबाड़ी भवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।

कार्यकर्ता नहीं यह भी बताया कि जिस झोपड़ी में मैं आंगनबाड़ी लग रही हूं, इस मकान के लोग अन्य राज्यों में रोजी-रोटी के लिए पलायन कर चुके हैं।

उनके आने के बाद फिर मुझे या तो खुले आसमान में या फिर झाड़ के नीचे आंगनवाड़ी लगाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

वही ग्रामीणों ने यह भी बताया कि हमने 181 पर भी शिकायत की है लेकिन हमारे जो नौनिहाल है वह शिक्षा से वंचित होते नजर आ रहे हैं।

सरपंच सचिव एवं आल्हा अधिकारियों का हिसार कोई ध्यान नहीं।

अब देखना होगा कि क्या इन मासूम बच्चों के भविष्य को इसी तरह से सावरा जाएगा या फिर इसी तरह झोपड़ी में शिक्षा पाकर इति श्री होना पड़ेगा।

 

लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक मंजू दादू सिर्फ चुनाव के समय आती है और उसके बाद उनके कभी दर्शन नहीं होते और नहीं वह फोन उठाती है।

यह शिकायत हमेशा ग्रामीणों ,यहां तक की भाजपा कार्यकर्ताओं की भी रहती है।

नेपानगर विधानसभा के सभी लोग यही शिकायत करते नजर आ रहे हैं।

अब देखना यह है कि स्थानीय शासन प्रशासन इन मासूम बच्चों के भविष्य को स्वर पता या नहीं यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

 

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