जिले में तरबूज क्रांति! होली पर बाजार में होगी बंपर एंट्री, किसानों को बड़े मुनाफे की उम्मीद

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नेपानगर क्षेत्र में बंपर तरबूज उत्पादन की उम्मीद, होली के आसपास होगी तुड़ाई

 

नेपानगर क्षेत्र में इस वर्ष तरबूज की खेती ने किसानों को नई उम्मीद दी है। अनुकूल मौसम और बेहतर फसल प्रबंधन के चलते इस बार बंपर उत्पादन की संभावना जताई जा रही है।

 

पिछले वर्ष तरबूज की फसल में कई क्षेत्रों में मुख्य रूप से वायरस जनित रोग देखने को मिले थे। तरबूज में आमतौर पर ये वायरस ज्यादा नुकसान करते हैं:

जैसे मोज़ेक वायरस (Mosaic Virus)

पत्तियों पर पीले-हरे चित्तीदार धब्बे

पत्तियां सिकुड़ना और मुड़ना

फल छोटे रह जाना जिससे

उत्पादन में भारी कमी आई थी। परन्तु इस वर्ष खेतों में हरी-भरी बेलों पर लगे बड़े आकार के तरबूज अच्छी पैदावार का संकेत दे रहे हैं।

ग्राम घाघरला के किसान मुकेश तुलसीराम चौहान ने बताया कि इस बार उनकी फसल उत्कृष्ट स्थिति में है। उन्होंने समय पर बुवाई, संतुलित खाद और नियमित सिंचाई का विशेष ध्यान रखा है। उनका कहना है कि यदि मौसम साथ देता रहा तो उत्पादन अच्छा मिलेगा और बाजार में बेहतर दाम भी मिल सकते हैं।

क्षेत्र के किसानों के अनुसार, ज्यादातर तरबूजों की तुड़ाई होली के आसपास शुरू होगी। त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे किसानों को अच्छा लाभ मिल सकता है। व्यापारियों ने भी खेतों का दौरा शुरू कर दिया है और अग्रिम बुकिंग की चर्चाएं भी चल रही हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल बना रहा तो नेपानगर क्षेत्र में इस वर्ष तरबूज की फसल किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी। होली के आसपास होने वाली तुड़ाई से बाजार में ताजे और गुणवत्ता वाले तरबूज की अच्छी आवक रहने की संभावना है।

 

इसी बीच क्षेत्र के प्रगतिशील किसान रितेश कडू निंबालकर ने एक ही वर्ष में दो बार तरबूज की सफल फसल लेकर मिसाल पेश की है।

जानकारी के अनुसार कडू निंबालकर ने पहली फसल बारिश के मौसम में ली थी, जिसमें उन्हें अच्छी पैदावार और संतोषजनक दाम प्राप्त हुए। इसके बाद उन्होंने खेत की तैयारी कर दोबारा तरबूज की बुवाई की, जो वर्तमान में अच्छी स्थिति में खड़ी है। खेतों में बेलों पर लगे स्वस्थ फल बंपर उत्पादन का संकेत दे रहे हैं।

किसान रितेश निंबालकर का कहना है कि समय पर बुवाई, संतुलित उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण और नियमित सिंचाई उनकी सफलता का मुख्य कारण है। उन्होंने आधुनिक तकनीकों और ड्रिप सिंचाई पद्धति का भी उपयोग किया, जिससे फसल की गुणवत्ता बेहतर बनी रही।

क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए यह एक प्रेरणादायक उदाहरण माना जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही फसल चक्र और वैज्ञानिक पद्धति अपनाकर वर्ष में दो बार तरबूज की खेती कर अच्छा लाभ कमाया जा सकता है।

अन्य किसानों में भी उत्साह का माहौल है और वे भी उन्नत खेती की ओर कदम बढ़ा रहे

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