वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा: दीदियाँ उतारेंगी बाजार में हर्बल रंगों की खुशबू

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प्रदेश सरकार के संकल्प को साकार करती दीदियाँ, प्राकृतिक रंग-गुलाल से सज रही होली

आइये इस ‘‘कृषक कल्याण वर्ष’’ में प्राकृतिक रंगों से मनाए सुरक्षित होली

दो दिवसीय ‘आजीविका होली मेला’ में सजेगा प्राकृतिक रंगों का बाजार

फूलों से बने प्राकृतिक रंग-गुलाल को बाजार में उतारेंगी दीदियाँ

बुरहानपुर- राज्य सरकार प्रदेश की बहनों के सशक्तिकरण के लिये संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में वर्ष 2026 ‘‘कृषक कल्याण वर्ष’’ में आजीविका मिशन से जुड़ी दीदियाँ भी सहभागिता कर रही है। होली के उपलक्ष्य में पर्यावरण संरक्षण एवं प्राकृतिक रंग-गुलालों से त्योहार मनाने का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है।

दो दिवसीय “आजीविका होली मेला”

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत संचालित मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा होली पर्व के उपलक्ष्य में जिले में 27 एवं 28 फरवरी को पुराना अनुविभागीय कार्यालय (एसडीएम ऑफिस) सिटी पैलेस मॉल के सामने दो दिवसीय भव्य “आजीविका होली मेला” आयोजित किया जा रहा है। ‘‘कृषक कल्याण वर्ष’’ अंतर्गत आयोजित इस मेला में महिलाओं को सीधे बाजार से जोड़ने का अवसर दिया जा रहा है। ‘‘वोकल फॉर लोकल’’ के तहत मेला के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलेगी है और महिलाओं को अपने हुनर को प्रदर्शित करने का मंच भी प्राप्त होगा।

फूलों से बने प्राकृतिक रंग-गुलाल बाजार में उतारेंगी दीदियाँ

होली रंगों, उमंगों और आपसी प्रेम का त्योहार है, रासायनिक रंगों से होने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए प्राकृतिक रंगों का महत्व बढ़ गया है। पलाश, गुलाब और गेंदा जैसे फूलों से तैयार गुलाल पूरी तरह सुरक्षित और पर्यावरण हितैषी है। फूलों की खुशबू से बने ये रंग न केवल मुस्कान बिखेरेंगे बल्कि स्वास्थ्य की भी रक्षा करेंगे। प्राकृतिक रंगों के साथ मनाई गई होली उत्सव के साथ-साथ स्वास्थ्य और परंपरा को भी संरक्षित करती है। महिलाओं का यह प्रयास केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम है।

‘‘वोकल फॉर लोकल’’- प्राकृतिक रंगों का बाजार

मेला में आजीविका मिशन की दीदियों द्वारा तैयार हर्बल गुलाल, प्राकृतिक रंग, पापड़, अचार, पारंपरिक पकवान तथा हस्तशिल्प और सजावटी वस्तुओं की प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए स्टॉल लगाए जाएंगे। प्राकृतिक रंग-गुलाल की खास मांग को देखते हुए इस बार इनका विशेष स्टॉल लगाया जा रहा है।

पूरी तरह प्राकृतिक, सुरक्षित और किफायती

“आजीविका होली मेला” में हर्बल गुलाल का 100 ग्राम का पैकेट 80 रुपये तथा 200 ग्राम का पैकेट 150 रुपये में उपलब्ध रहेगा। इन रंगों में किसी भी प्रकार के रासायनिक तत्व का उपयोग नहीं किया गया है। ये रंग त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल हैं।

फूलों से रंग-गुलाल बनाने की प्रक्रिया

प्राकृतिक रंग तैयार करने की प्रक्रिया सरल है, महिलाएं पलाश के फूल और किसानों से गुलाब और गेंदा जैसे रंग-बिरंगे फूल खरीदती हैं। फूलों की पंखुड़ियों को अलग कर 2 से 3 दिन तक सोलर ड्रायर में सुखाया जाता है। इसके बाद सूखी पंखुड़ियों को बारीक पीसकर पाउडर बनाया जाता है, फिर उसमें चावल, मक्का आटा और हल्दी मिलाकर रंग तैयार किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में 4 से 5 दिन का समय लगता है। जिले के खकनार खुर्द में यह कार्य नारी शक्ति समूह की 8 से 10 महिलाएं कर रही हैं। आइए इन स्थानीय उत्पादों की खरीददारी कर अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में योगदान दे।

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