नेपा लिमिटेड ने टाला पेयजल संकट, सकारात्मक माहौल में अपने संसाधनों से चालू किया 60 साल पुराना जल संयंत्र।
कागज की काशी के नाम से विख्यात एशिया की प्राचीनतम शासकीय पेपर मिलों में शामिल केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के उपक्रम नेपा लिमिटेड ने एक बार फिर उद्योग के साथ सामाजिक दायित्व निभाने की अपनी परंपरा को सिद्ध किया है। लगभग 60 वर्ष पुराने जल शोधन संयंत्र को अपने ही संसाधनों से चालू कर संस्थान ने जहां नगर को संभावित पेयजल संकट से बचाया, वहीं लाखों रुपये के अतिरिक्त व्यय को भी टाल दिया।
नवागत सीएमडी नरेश सिंह के नेतृत्व में संस्थान में सकारात्मक और कार्योन्मुख वातावरण निर्मित होने के बाद लंबित तकनीकी कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जा रहा है। हाल ही में नवीनीकृत संयंत्रों का परीक्षण केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के प्रतिनिधि मंडल के समक्ष सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इसके साथ आयोजित वेंडर मीट के बाद देशभर के वेंडर्स और सप्लायर्स ने नेपा लिमिटेड में व्यावसायिक संभावनाओं के प्रति गहरी रुचि दिखाई है। संस्थान में बने इसी सकारात्मक माहौल का परिणाम है कि लंबे समय से लंबित जटिल कार्य भी अब तेजी से पूरे हो रहे हैं।
नगर की पेयजल व्यवस्था जिस नावथा जल शोधन संयंत्र पर निर्भर है, वह पिछले लगभग छह माह से बंद था। ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए स्थिति गंभीर मानी जा रही थी। निर्माता कंपनी से संपर्क करने पर सर्वेक्षण, इंजीनियर तथा आवश्यक पार्ट्स सहित मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च का अनुमान दिया गया। इसके बाद नेपा लिमिटेड के यांत्रिकी विभाग ने संयंत्र को अपने स्तर पर चालू करने की जिम्मेदारी ली।
मुख्य महाप्रबंधक कार्य राम अलागेसन के मार्गदर्शन में टीम गठित की गई। टीम ने संस्थान के ही मानव संसाधन, यांत्रिकी कार्यशाला में तैयार किए गए पार्ट्स तथा उपलब्ध उपकरणों की सहायता से लगभग एक माह के सतत प्रयासों में बंद पड़े संयंत्र को सफलतापूर्वक चालू कर दिया। इसके बाद नगर की जलापूर्ति सामान्य हो गई और संभावित संकट टल गया।
जन संपर्क अधिकारी संदीप ठाकरे ने बताया कि वर्ष 1966 में हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड बॉम्बे द्वारा स्थापित यह जल शोधन संयंत्र नगर की पेयजल व्यवस्था की मुख्य कड़ी है। इसे नेपा लिमिटेड ने अपने ही मानव संसाधन, यांत्रिकी कार्यशाला में निर्मित पार्ट्स तथा तकनीकी दक्षता के बल पर दुरुस्त कर न केवल नगर को संभावित जल संकट से बचाया, बल्कि कंपनी को होने वाले भारी व्यय से भी सुरक्षित रखा। उन्होंने बताया कि सीएमडी नरेश सिंह के मार्गदर्शन में संस्थान में सकारात्मक कार्यसंस्कृति विकसित हुई है, जिसके परिणामस्वरूप लंबे समय से लंबित तकनीकी कार्यों को भी प्राथमिकता के साथ पूर्ण किया जा रहा है। इस कार्य में यांत्रिकी विभागाध्यक्ष महेंद्र केशरी ,प्रबंधक यांत्रिकी विजय चौधरी, उप प्रबंधक पिंटू कुमार गौतम, वरिष्ठ फिटर उमाकांत पाटिल, वरिष्ठ फिटर युवराज पाटिल, उमेश पाटिल, अमितेश थानेकर, अखिलेश गौतम, गणेश जाधव, विजय महाजन, मीनराज बैरवा, हितेश चौधरी, विकास सोनवने, देवीदास चौधरी, अभियंता पंकज पाटिल, अभियंता विक्रांत बरने, विशाल चौधरी, मैकेनिकल वर्कशॉप प्रभारी किसन चौधरी के साथ नावथा ट्रीटमेंट प्लांट से इंजीनियर लोकेन्द्र सेंगर, ऑपरेटर मुकेश मालवीय, राजेश ठाकुर, विद्युत विभाग से इलेक्ट्रीशियन संजय पाटिल एवं योगेश चौधरी तथा सिविल विभाग से इंजीनियर मयंक राय और सुशील चौहान का विशेष सहयोग रहा।