सप्तखंजिरी की गूंज में डूबा धामनगांव—संदीप पाल महाराज के कीर्तन ने भक्ति, हास्य और जीवन दर्शन से बांधा जनसमूह।

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सप्तखंजिरी की गूंज में डूबा धामनगांव—संदीप पाल महाराज के कीर्तन ने भक्ति, हास्य और जीवन दर्शन से बांधा जनसमूह।

बुरहानपुर। ग्राम धामनगांव में आयोजित मां वाघेश्वरी ग्रामोदय मेला के द्वितीय दिवस पर श्रद्धा, उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। इस दिन का प्रमुख आकर्षण महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध सप्तखंजिरी वादक एवं कीर्तनकार संदीप पाल महाराज का प्रभावशाली नवखंजरी (सप्तखंजिरी) कीर्तन रहा, जिसने हजारों श्रद्धालुओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध कर दिया।

संदीप पाल महाराज अपनी अनूठी “फुल कॉमेडी कीर्तन” शैली के लिए देशभर में विख्यात हैं। उन्होंने अपने कीर्तन में भक्ति रस के साथ हास्य-व्यंग्य का ऐसा संतुलित और सजीव समावेश प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं को न केवल आनंदित किया बल्कि गहराई से प्रभावित भी किया। उनके द्वारा प्रस्तुत भजन, कथाएं और प्रसंगों में जहां आध्यात्मिक गूढ़ता झलकती रही, वहीं सरल भाषा और चुटीले अंदाज ने हर वर्ग के लोगों को सहज रूप से जोड़ लिया।

कीर्तन के दौरान महाराज ने समाज में व्याप्त कुरीतियों, जीवन की भागदौड़, पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों पर हास्य के माध्यम से तीखे लेकिन सकारात्मक संदेश दिए। उन्होंने यह भी बताया कि भक्ति का मार्ग कठिन नहीं, बल्कि सरल और आनंदमयी होना चाहिए, जिससे आम जन भी सहजता से उससे जुड़ सके। उनकी लयबद्ध सप्तखंजिरी वादन शैली, प्रभावी मंच संचालन और संवादात्मक प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाएं, पुरुष, युवा और बुजुर्ग सभी भक्ति में लीन होकर झूमते नजर आए। पूरा मेला परिसर तालियों की गड़गड़ाहट, हर्षोल्लास और जयघोष से गूंज उठा। यह दृश्य न केवल एक धार्मिक आयोजन का था, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जीवंतता का भी प्रतीक बनकर उभरा।

इस अवसर पर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने श्रद्धालुओं के साथ बैठकर कीर्तन का श्रवण किया और कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ग्रामवासियों के उत्साह और सहभागिता की सराहना करते हुए कहा कि मां वाघेश्वरी ग्रामोदय मेला आज क्षेत्र की पहचान बन चुका है।

उल्लेखनीय है कि यह मेला 19 मार्च से 27 मार्च (श्रीराम नवमी) तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रतिदिन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की विविध श्रृंखला चल रही है। भजन संध्या, कीर्तन, पारंपरिक दंगल, लावणी नृत्य, व्यायामशाला प्रदर्शन, खेल प्रतियोगिताएं, कृषि आधारित प्रशिक्षण और हस्तशिल्प बाजार जैसे आयोजन मेले को बहुआयामी स्वरूप प्रदान कर रहे हैं। मां वाघेश्वरी ग्रामोदय मेला आज केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक उत्थान का सशक्त मंच बन चुका है। द्वितीय दिवस का यह सप्तखंजिरी कीर्तन कार्यक्रम मेले की भव्यता, लोकप्रियता और आध्यात्मिक प्रभाव को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला साबित हुआ, जिसे लंबे समय तक श्रद्धालु स्मरण करते रहेंगे।

*22 मार्च को कांटा-कुश्ती का विशाल आम दंगल*

मां वागेश्वरी ग्रामोदय मेला अंतर्गत 22 मार्च रविवार को पारंपरिक कांटा-कुश्ती का विशाल आम दंगल होगा। 23 मार्च सोमवार को नागपुर की चंद्रमुखी लावणी डांस ग्रुप द्वारा रंगारंग प्रस्तुति, 24 मार्च मंगलवार को बाबा खाटू श्याम जी का भव्य दरबार एवं भजन संध्या, 25 मार्च बुधवार को इंडियन आइडल फेम गायक राहुल द्वारा भक्ति गीतों की प्रस्तुति होगी।।इसी प्रकार 26 मार्च गुरुवार को शेखर निरंजन भाखरे (सिल्लौड) द्वारा भारुंड रंग कार्यक्रम एवं 27 मार्च शुक्रवार को अरुण मनी लख्खा की सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ समापन होगा।

*मेले में सजी ग्रामीण हुनर की झलक, अर्चना चिटनिस ने किया भ्रमण*

मां वाघेश्वरी ग्रामोदय मेले के दौरान विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस ने मेले में लगी विभिन्न दुकानों का भ्रमण किया। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की समृद्ध हस्तकला, स्थानीय उत्पादों और लघु उद्योगों की आकर्षक झलक देखने को मिली, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। मेले में प्रदर्शित हस्तनिर्मित वस्तुएं, पारंपरिक कलाकृतियां और स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पाद न केवल ग्रामीण प्रतिभा को उजागर कर रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता और स्वदेशी भावना को भी सशक्त बना रहे हैं। इन स्टॉल्स के माध्यम से ग्रामीण कारीगरों और छोटे उद्यमियों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और उन्हें बाजार उपलब्ध कराने का प्रभावी मंच मिल रहा है। इस अवसर पर विधायक श्रीमती अर्चना चिटनिस ने स्थानीय कला और शिल्प की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण प्रतिभाओं को पहचान दिलाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कारीगरों का उत्साहवर्धन भी किया। यह मेला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि ग्रामीण विकास और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन देने का भी सशक्त माध्यम बनता जा रहा है।।

 

 

 

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