तापी पुनर्भरण परियोजना के खिलाफ निर्णायक हुंकार, अखिल भारतीय तापी संघर्ष समिति गठित

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अखिल भारतीय तापी संघर्ष समिति के कार्यकारिणी घोषित

 

ज्ञात होगी तापी नदी पर तापी पुनर्भरण परियोजना का निर्माण कार्य किसी भी समय शुरू हो सकता है महाराष्ट्र एवं मध्य प्रदेश की सहमति के उपरांत इसे राष्ट्रीय परियोजना में शामिल किए जाने हेतु केंद्र सरकार के पास भेजा गया है केंद्र की सहमति किसी भी समय घोषित हो सकती है इसके पश्चात तापी पुनर्भरण प्रकल्प का निर्माण कार्य की संभावना सुनिश्चित मानीं जा रही है इन्हीं सभी दशा एवं स्थिति को ध्यान में रखकर कल 13 जनवरी 2026 ग्राम भिलट हरदा में तीनों जिले बैतूल, खंडवा एवं अमरावती के विभिन्न संघटना और सामाजिक संस्थाओं के अहम बैठक संपन्न हुई जिसमें बहुत बड़ी संख्या में किसान एवं आदिवासीयों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई इस अहम बैठक में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई जिसके केंद्र में तापी पुनर्भरण परियोजना थी सभी ने दृढ़ संकल्पित होकर निर्णय लिया कि सरकार की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी ,किसी भी स्थिति में बांध का विरोध प्रखरता से किया जाएगा किंतु संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से इस महत्वपूर्ण बैठक में अखिल भारतीय स्तर के समिति का सृजन किया गया जिसमें सर्वसम्मति से डॉ.रवि कुमार पटेल को नेतृत्व हेतु निर्धारित किया गया तथा अखिल भारतीय तापी संघर्ष समिति के अध्यक्ष के रूप में चुना गया अन्य कार्यकारिणी में उपाध्यक्ष के रूप में राजकुमार मरस्कोले (बैतूल) ,रामगोपाल में मावस्कर (अमरावती), गोविंद उईके (खंडवा), महासचिव – दिलीप जवारकर (अमरावती), सचिव- भीम सिंह कुमरे (बैतूल) ,बाबूलाल कास्देकर (खंडवा), श्रीचंद जांभेकर (अमरावती), कोषाध्यक्ष- राजा कास्देकर अधिकार (अमरावती) ,प्रभुदास काजले (खंडवा ) ,द्वारकानाथ उईके ( बैतूल), सलाहकार – राम काकोडे ( बैतूल), मनीराम सुथार (खंडवा),

राजकुमार पटेल (अमरावती), एड. ब्रदर जोश (अमरावती) आदि अन्य महत्वपूर्ण सदस्यों का चयन किया गया एवं पूर्ण कटिबद्धता से तापी मैया एवं किसानों, आदिवासियों पर किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया गया । इस अवसर पर तीनों जिले से बड़ी संख्या में किसानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर आक्रोश व्यक्त किया

ताप्ती मैया की अविरल धारा से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ” एक तापी ही सर्वश्रेष्ठ , पवित्र एवं पूर्णता को प्रदान करती है इसे तीन तापी बनाने की आवश्यकता नहीं है ऐसा प्रतिपादन डॉ रवि कुमार पटेल ने किया, यह सुनिश्चित माना जा रहा है कि आने वाले समय में सरकार और किसान ,आदिवासी आमने-सामने होंगे एक तरफ सरकार एवं जल संसाधन विभाग पेयजल और किसानो की खेती के समृद्धि की बात करती है, दूसरी और संघर्ष समिति, तापी की अविरल धारा ,आदिवासी, वन, पर्यावरण एवं भविष्य की चुनौतियों को लेकर के आशंकित हैं ।

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