होलिका दहन में नई सोच — लकड़ियों की जगह उपलों से पर्यावरण संरक्षण की पहल।

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बुरहानपुर।

बुरहानपुर में रंगों के पर्व होली की तैयारियां पूरे उत्साह के साथ जारी हैं। बाजारों में रंग-गुलाल की रौनक है, लेकिन इस बार होलिका दहन को लेकर एक अनोखी और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी पहल ने सबका ध्यान खींचा है। ज्ञानेश्वर पाटिल ने पेड़ों की कटाई रोकने और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से खुद अपने हाथों से गोबर के उपले बनाकर समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया।

 

खंडवा-बुरहानपुर संसदीय क्षेत्र के सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि हर वर्ष होलिका दहन के नाम पर बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ काट दिए जाते हैं, जिससे पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचता है। उन्होंने कहा कि त्योहारों की आड़ में प्रकृति को क्षति पहुंचाना हमारी संस्कृति नहीं है। इसे रोकने के लिए उन्होंने स्वयं उपले तैयार किए और लोगों से अपील की कि लकड़ियों की जगह गोबर के उपलों का उपयोग कर होलिका दहन करें।

 

सांसद ने कहा, “होली बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। ऐसे में यदि हम प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें, तो यह सच्चे अर्थों में त्योहार मनाने जैसा होगा। गोबर के उपलों से भी विधि-विधान के साथ होलिका दहन किया जा सकता है, इससे पेड़ भी बचेंगे और प्रदूषण भी कम होगा।

 

इस मौके पर स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता अमोल भगत भी उपस्थित रहे। उन्होंने इस पहल को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यदि समाज मिलकर ठान ले तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने नागरिकों से अधिक से अधिक संख्या में इस मुहिम से जुड़ने और ग्रीन होली मनाने की अपील की।

 

बुरहानपुर में इस पहल की चर्चा जोरों पर है। कई सामाजिक संगठनों और युवाओं ने भी इसे सराहनीय कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तरह की पहल व्यापक स्तर पर अपनाई जाए, तो होली जैसे बड़े त्योहार के दौरान होने वाली पर्यावरणीय क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

 

त्योहारों की खुशियों के बीच यह संदेश साफ है—परंपरा भी निभे और प्रकृति भी बचे।

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