मध्य प्रदेश का एक ऐसा गांव जहां कभी चुनाव नहीं हुआ।
पंच सरपंच निर्विरोध चुने जाते हैं।
महिला सशक्तिकरण की मिसाल मांजरोद पंचायत देश की आजादी के बाद हमेशा निर्विरोध चुनाव।।
बुरहानपुर जिले की ग्राम पंचायत मांजरोद कला में पंचों से लेकर सरपंच सभी महिलाएं. विकास की नई इबारत लिख रही पंचायत.
महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी
मांजरोद कला पंचायत
बुरहानपुर : जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत मांजरोद कला पिंक पंचायत है. खास बात ये है कि इस गांव में आजादी के बाद से कभी चुनाव नहीं हुए. गांव में पंचायत चुनाव के दौरान चौपाल बैठाई जाती है. चौपाल में महिलाएं, पुरुष सर्वसम्मति से सारे पंच और सरपंच का चयन करते हैं. दो बार यानि 9 वर्षों से गांव सरकार यानि ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी महिलाओं को सौंपी गई है. वर्तमान में सरपंच, उपसरपंच से लेकर 11 वार्डों की पंच भी महिलाएं हैं.
ग्राम पंचायत को मिला था 15 लाख पुरस्कार
साल 2022 में निर्विरोध चुनाव हुए. महिला नेतृत्व के चलते पंचायत को कुल 15 लाख रुपए का पुरस्कार मिला. इस राशि को गांव के विकास कार्यों में खर्च किया गया. इन 4 साल में महिला नेतृत्व ने गांव की तस्वीर को बदल दिया. सभी वार्डों में पर्याप्त पेयजल सप्लाई हो रहा है. पूरे गांव में पक्की सड़कें हैं. ये गांव प्रधानमंत्री आवास प्लस योजना में चयनित हुआ है. गांव में शत-प्रतिशत टैक्स वसूली होती है. इससे ग्रामीणों में बेहतर मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराई जाती हैं.
ग्राम पंचायत मांजरोद कला की सरपंच लाड़की बाई सावलकर
पंचायत सचिव से चर्चा करती सरपंच लाड़की बाई सावलकर
गांव में विकास कार्यों पर जोर
गांव में दो आंगनवाड़ी भवन, प्राथमिक स्कूल सहित माध्यमिक स्कूल हैं. शादी और अन्य आयोजनों के लिए सामुदायिक मंगल भवन भी है. हर घर नल जल योजना के तहत पेयजल सप्लाई होती है. साथ ही आपात स्थिति में पेयजल आपूर्ति के लिए दो ट्यूबवेल किए गए हैं. मवेशियों के लिए सार्वजनिक कुंड बनाए गए हैं. नया पंचायत भवन निर्माणाधीन है. साल 2022 में लाड़की बाई सावलकर घर में कामकाज में व्यस्त थी, इस दौरान चौपाल में उनके नाम पर सहमति बनी. सभी ने उन्हें निर्विरोध चुना.
ग्राम पंचायत मांजरोद कला में निर्माण कार्य
बुरहानपुर की ग्राम पंचायत मांजरोद कला में चकाचक सड़कें
गांव में 300 परिवार, सभी एकजुट
सरपंच लाड़की बाई सावलकर ने बताया “यहां ग्राम पंचायत का चुनाव नहीं होता. यहां सभी पदों के लिए निर्विरोध रूप से प्रतिनिधि चुने जाते हैं. साल 2022 में भी सरपंच से लेकर पंचों का निर्णय सर्वसहमति से हुआ. मैंने 4 साल में गांव में विकास को प्राथमिकता दी.” ग्रामीण व भाजपा किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष राहुल जाधव बताते हैं “ग्राम पंचायत मांजरोद की कुल आबादी 1500 है. यहां 300 परिवार हैं. गांव में 900 मतदाता हैं. 1500 की आबादी वाले गांव में कभी चुनाव नहीं हुआ.”
मांजरोद कला पंचायत में विकास कार्यों पर जोर
अशोकनगर में गजब हाईटेक ग्राम पंचायत, CCTV, WIFI, गार्डन देख ज्योतिरादित्य सिंधिया इंप्रेस
युवा सरपंच ने गांव को बनाया गजब हाईटेक, एक कमरे में बैठ हर गली पर होती है नजर
चौपाल लगाकर करते हैं चुनाव
सहायक सचिव सुरेश गौतम ने बताया “जब से होश संभाला है गांव में कभी पंचायत चुनाव नहीं देखे. सर्वसहमति से सरपंच, उपसरपंच और पंचों को चुनते हैं।
वर्तमान में महिलाओं के हाथों में ग्राम पंचायत की कमान सौंपी गई है.” गांव के सीनियर सिटीजन प्रदीप जाधव बताते हैं “यहां कई पीढ़ियों से निर्विरोध चुनाव हो रहे हैं. आजादी के बाद कभी चुनाव की नौबत नहीं आई. चौपाल लगाकर सरपंच से लेकर पंचों का चयन किया जाता है।