बुरहानपुर की रत्ना दीदी ने रचा कमाल, प्राकृतिक खेती से लिखी समृद्धि की नई इबारत!

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प्राकृतिक खेती से बदल रही बुरहानपुर में खेती की तस्वीर
महिला कृषक रत्ना दीदी साढ़े 3 एकड़ में कर रही है प्राकृतिक खेती
बीज बैंक के माध्यम से बीजों के संरक्षण की भी पहल
सुरक्षित उत्पादों एवं स्वस्थ मृदा के साथ खेती का बदलता स्वरूप।

बुरहानपुर महिला कृषक आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सशक्त धुरी बनकर उभर रही हैं। खेतों में उनकी मेहनत, समर्पण और नवाचार की सोच कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे रही है। बीज बोने से लेकर फसल कटाई तक, महिलाओं की भूमिका केवल सहयोग तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे आत्मनिर्भरता और नेतृत्व का प्रतीक बन चुकी हैं। आधुनिक तकनीकों को अपनाकर महिला कृषक खेती को लाभकारी, टिकाऊ और समृद्ध बना रही हैं।
जिला मुख्यालय से करीबन 15 किलोमीटर दूर ग्राम बख्खारी निवासी रत्ना दीदी जिले के लिये महिला कृषक के रूप में प्रेरणा स्त्रोत बनी है। दृढ़ ईच्छाशक्ति के साथ लिये गये संकल्प के परिणाम तेजी से नजर आते है। अपने घरेलू काम-काज के साथ-साथ स्वयं को शिक्षित करने की जिम्मेदारी भी रत्ना दीदी ने उठाई। अपनी बेटी के साथ उन्होंने कक्षा 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। वे आगे भी योजनाबद्ध रूप से पढ़ाई कर रही है।
साढ़े तीन एकड़ में प्राकृतिक खेती, फसल विविधिकरण से बढ़ी आय
रत्ना दीदी बताती है कि रमाबाई स्व सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। वे, साढ़े तीन एकड़ से अधिक भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रही हैं, इस कार्य में उनके पति भी पूरा सहयोग करते है। रत्ना दीदी अपने खेत में ज्वार, मक्का, चना, तुअर, उड़द, केला, पालक, पपीता, बैगन, लौकी, तुरई, गिल्की, हल्दी, करेला एवं प्याज जैसी विभिन्न फसलें उगाती हैं। साथ ही वे मिश्रित एवं बहुफसली खेती अपनाकर भी अतिरिक्त लाभ अर्जित कर रही हैं।
कृषि विज्ञान केंद्र से मिला प्रशिक्षण, बनीं कृषि सखी
रत्ना दीदी कहती है कि समूह से जुड़ने के बाद मुझे कृषि सखी के रूप में कार्य करने का मौका मिला। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) में मैंने, 5 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर प्राकृतिक खेती के फायदे, आधुनिक तकनीकों, कृषि विधियों को जाना, समझा एवं अपने खेतों में अपनाया।
खुद तैयार करती हैं प्राकृतिक खाद एवं जैविक कीटनाशक
खेती में खाद एवं कीटनाशक इस्तेमाल करने के लिये रत्ना दीदी बताती है कि वे जीवामृत, बीजामृत, ब्रह्मास्त्र, नीमास्त्र, अग्नास्त्र एवं प्राकृतिक अर्क बनाकर उपयोग करती हैं। गोबर, गौमूत्र, गुड़, बेसन, छाछ तथा विभिन्न पत्तियों से तैयार किए गए ये जैविक उत्पाद मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के साथ-साथ फसलों को कीटों से भी सुरक्षित रखते हैं। अपने उपयोग के साथ-साथ वे इन उत्पादों का विक्रय गुरुवार को लगने वाले प्राकृतिक हाट बाजार के अलावा मेलों एवं स्थानीय बाजारों में भी विक्रय करती हैं।
कम लागत, उपजाऊ मिट्टी और बेहतर गुणवत्ता का लाभ
रत्ना दीदी बताती हैं कि उनका परिवार शुरूआत से ही खेती से जुड़ा है। प्राकृतिक खेती करने से खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति एवं गुणवत्ता बढ़ी है और उत्पादन में भी वृद्धि हुई है।
जिले में महिला सशक्तिकरण की मिसाल-रत्ना दीदी
रत्ना दीदी ने बताया कि वे कृषि सखी एवं बैंक सखी के कार्यों के साथ-साथ समूह की बैठकों का संचालन, महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराने में सहयोग, अभिलेख संधारण एवं विभिन्न गतिविधियों में भाग लेती है। रत्ना दीदी को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना का लाभ भी प्राप्त हो रहा है।
देशी बीजों के संरक्षण के लिए बीज बैंक बनाने की योजना
रत्ना दीदी अपनी भविष्य की योजनाओं के संबंध में कहती है कि वे प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने के साथ देशी बीजों के संरक्षण के लिए बीज बैंक तैयार करने का कार्य भी कर रही हैं। रत्ना दीदी कहती है कि मैंने बीज बैंक में बैंगन, लौकी, पालक, तुरई, भिंडी, ग्वारफली सहित अन्य सब्जियों के देशी बीजों का संग्रहण प्रारंभ किया है।
किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील
रत्ना दीदी ने अन्य किसानों से अपील करते हुए कहा है कि प्राकृतिक खेती अपनाकर स्वस्थ खाद्यान्न, कम लागत, बेहतर उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करे।
विदित है कि, प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में कृषक कल्याण वर्ष के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती, आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधिकरण एवं आत्मनिर्भर कृषि से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं तथा कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से किसान प्राकृतिक खेती को अपनाते हुए कम लागत में अधिक उत्पादन तथा बेहतर गुणवत्ता वाली फसलें एवं बीज तैयार कर रहे हैं।

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