खकनार से उठी बदलाव की लहर: 18 पंचायतों ने लिया ‘आदर्श ग्राम–सुशासन’ का ऐतिहासिक संकल्प

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खकनार में ‘आदर्श ग्राम’ की परिकल्पना को साकार करने आगे आए ग्रामीण, 18 पंचायतों के जनप्रतिनिधियों ने लिया सुशासन का संकल्प।

पंचायती राज व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और गांवों में सुशासन स्थापित करने के उद्देश्य से आगा खान ग्राम समर्थन कार्यक्रम (भारत) के तहत खकनार संकुल में एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में क्षेत्र की 18 पंचायतों के करीब 40 पंच, उपसरपंच और सरपंचों ने हिस्सा लिया और अपनी पंचायतों को ‘आदर्श पंचायत’ बनाने का संकल्प लिया। संस्था द्वारा इससे पूर्व जनप्रतिनिधियों के लिए आदर्श पंचायत ‘पटौदा’ का एक अध्ययन भ्रमण आयोजित किया गया था। वहां के विकास मॉडल और कार्यप्रणाली को देखने के बाद, उसे अपने गांवों में कैसे लागू किया जाए, इस पर कार्यशाला में विस्तार से चर्चा की गई। इसी प्रेरणा से आज 8 पंचायतों के सरपंचों ने सार्वजनिक रूप से संकल्प लिया कि वे अपनी पंचायतों को मजबूत बनाएंगे और गांव में सुशासन लागू करेंगे। कार्यशाला में पंचायतों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर विशेष चर्चा हुई। भौराघाट पंचायत के सरपंच रुइया किसन ने कहा कि पंचायतों को विकास कार्यों के लिए फंड की आवश्यकता होती है, इसलिए जल कर, भवन कर और संपत्ति कर को बढ़ावा देने पर बल दिया जाना चाहिए। कृष्णपाल सिंह ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि पंचायतें सही मायने में ‘आत्मनिर्भर’ तभी बनेंगी जब गांव का हर व्यक्ति टैक्स चुकाने को अपनी नैतिक जिम्मेदारी समझेगा। कार्यशाला में पूजा गुप्ता ने पोस्टर गतिविधि के माध्यम से बताया कि कैसे नए आइडिया अपनाकर पंचायतें बेहतर कार्य कर सकती हैं। वहीं, संस्था से गणेश जगताप ने पटौदा ग्राम की अवधारणा को समझाते हुए बताया कि पंचों की ‘वार्ड वार’ जिम्मेदारी कैसे तय की जानी चाहिए, ताकि विकास हर घर तक पहुंचे। जनकल्याण हेतु ग्राम सभा में सभी लोगों की भागीदारी को ग्रामीण विकास एवं परिवर्तन का मार्ग बताया। कार्यक्रम के अंत में सभी जनप्रतिनिधियों ने मजबूत पंचायत निर्माण एवं सुशासन हेतु सामूहिक शपथ ली। इस अवसर पर गोविंद राठौड़ सहित संस्था के अन्य सदस्य और ग्रामीण जन उपस्थित थे।

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