
माघ स्नान की आस्था पर अव्यवस्था का साया: ताप्ती घाटों पर महिलाओं की गरिमा खुले आसमान तले शर्मसार
माघ माह आते ही ताप्ती मैया के घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में महिलाएं माघ स्नान एवं पूजन के लिए ताप्ती घाटों पर पहुंचती हैं। विशेष रूप से माघ माह में होने वाले आसराई पूजन के लिए महिलाओं का आगमन परंपरा और विश्वास से जुड़ा है। महिलाएं ताप्ती मैया की पूजा-अर्चना कर अपने स्वास्थ्य, परिवार की सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की कामना करती हैं।
लेकिन इस धार्मिक आस्था के बीच एक बेहद शर्मनाक और चिंताजनक सच्चाई सामने आ रही है। ताप्ती घाटों पर स्नान के बाद महिलाओं को कपड़े बदलने के लिए कोई सुरक्षित या पृथक व्यवस्था नहीं है। खुले आसमान के नीचे, भीड़-भाड़ के बीच, कई लोगों की मौजूदगी में महिलाओं को मजबूरी में कपड़े बदलने पड़ते हैं। यह स्थिति महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और निजता पर सीधा प्रहार है।
विडंबना यह है कि नगर निगम हर मंच से विकास, सुविधा और महिला सशक्तिकरण की बात करता है, लेकिन ताप्ती घाटों की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। ग्रामीण एवं दूर-दराज के इलाकों से आने वाली महिलाएं इस असहज स्थिति को शब्दों में बयां तक नहीं कर पातीं, लेकिन भीतर ही भीतर अपमान और संकोच का दर्द सहती हैं।
स्थानीय लोगों द्वारा नगर निगम को पहले भी इस गंभीर समस्या से अवगत कराया जा चुका है, इसके बावजूद आज तक न तो वस्त्र बदलने के लिए कक्ष बनाए गए और न ही कोई अस्थायी व्यवस्था की गई। सवाल यह उठता है कि क्या आस्था के केंद्रों पर महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाएं देना भी प्रशासन की प्राथमिकता में नहीं है?
अब आवश्यकता है कि नगर निगम केवल कागजी योजनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि ताप्ती घाटों पर महिलाओं के लिए तत्काल सुरक्षित वस्त्र बदलने की व्यवस्था, शौचालय और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए, ताकि माघ स्नान की आस्था सम्मान और सुरक्षा के साथ निभाई जा सके।