
सैफिया हमीदिया यूनानी तिब्बिया महाविद्यालय प्रबंधन समिति द्वारा शैक्षणिक कर्मचारियों के साथ किए जा रहे भेद भाव पूर्ण रवैया, वेतन में उचित वृद्धि की मांग एंव छात्र/छात्राओं के भविष्य के साथ किए जा रहे खिलवाड की शिकायत ।
स्थानीय सैफिया हमीदिया यूनानी तिब्बिया कॉलेज में विगत वर्ष माह जुलाई से शैक्षणिक कर्मचारियों द्वारा प्रबंधन समिति से बढती हुई मंहगाई को देखते हुए वेतन वृद्धि की मांग की जा रही है थी जिस के बाद प्रबंधन समिति द्वारा भेद भाव पूर्ण रवैया अपनाते हुए पद एंव अनुभव के आधार पर वेतन न बढ़ाते हुए मात्र पांच-पांच हजार रूपये ही वेतन में वृद्धि की है जो कि शैक्षणिक कर्मचारियों को अस्विकार है।
बल्कि शैक्षणिक कर्मचाचारियों में ऐसे कर्मचारियों को अधिक आर्थिक लाभ दिया गया है जिनकी नियुक्ति कॉलेज कोड-28 के अनुसार भी नही की गई है।
आपको ज्ञात हो कि शैक्षणिक कर्मचारियों में कुछ कर्मचारी ऐसे भी है जिनको अस्सिटेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर डिपार्टमेंटल प्रमोशन को दो-दो-तीन-तीन वर्ष होने को आए हैं लेकिन उनको उनके पद अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है. और कुछ अस्सिटेंट प्रोफेसर को एसोसिएट प्रोफेसर के बराबर का वेतन एंव लाभ दिया जा रहा है।
कुछ असिसटेंट प्रोफेसर ऐसे हैं जिनके शैक्षणिक अनुभव को 15-15 साल होने को आए हैं लेकिन उनके बार बार आवेदन करने के बाद भी उनको प्रमोशन नहीं दिया गया, बल्कि कुछ ऐसे कर्मचारी हैं जिनकों अभी कॉलेज में नियुक्ति किए हुए मात्र दो माह ही हुए है और उनको एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर के पद पर प्रमोशन देकर वेतन के साथ साथ बहोत सी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है जो कि पुराने और अनुभवी कर्मचारियों के साथ अन्याय है।
आप को ज्ञात हो कि महाविद्यालय में सालों से शासी निकाय भंग पड़ी है और जिसके बिना ही कॉलेज का संचालन हो रहा है और न ही सालों से शासी निकाय की कोई मीटिंग हुई है।
ज्ञात हो कि विगत कई महीनों से महाविद्यालय में छात्र/छात्राएं कक्षाओं में अनुपस्थित है और नियमित कक्षाओं का संचालन नही हो रहा है और परीक्षा के समय विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लघंन करते हुए प्रबंधन समिति शैक्षणिक कर्मचारियों पर दबाव बनाकर 75 प्रतिशत से कम उपस्थित वाले छात्र/छात्राओं को परीक्षा में सम्मिलित कराती है. कई विभागों में विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नही है जिसके कारण छात्र/छात्राओं को मजबूरी में अन्य विषय विशेषज्ञ से पढ़ने के लिए मजबूर होना पडता है।
ज्ञात हो कि महाविद्यालय में छात्रावास बना होने के बाद भी छात्राओं को छात्रावास में रहने की अनमति नहीं दी जा रही है और जब छात्राएं छात्रावास में रहने की मांग करती है तो उनसे कहां जाता है कि अगर छात्रावास में रहना है तो लिखित मे देना होगा कि हम अपनी जिम्मेदारी पर रहेंगे और संस्था की इसमें कोई जिम्मेदारी नहीं होगी ।
और न ही महाविद्यालय में छात्र/छात्राओं के लिए कोई वर्क शॉप या सेमिनार कराए जाते है । ज्ञात हो कि छात्र/छात्राओं को किसी भी प्रकार का शैक्षणिक भ्रमण नहीं कराया जाता है।
आपको ज्ञात हो कि जब शैक्षणिक कर्मचारियों ने उक्त विषयों पर प्रबंधन समिति से बैठक कर चर्चा हेतु समय मांगा गया तो प्रबंधन समिति की ओर से चर्चा हेतु न ही समय दिया गया और न कोई आश्वासन दिया गया है।
उक्त समस्याओं को गंभीरता पूर्वक लेते हुए शैक्षणिक कर्मचारियों के हित एंव छात्र/छात्राओं के हितो को ध्यान में रखते हुए किसी एक प्रशासनिक अधिकारी की उपस्थिति में उक्त समस्याओं के निराकरण हेतु उचित कार्यवाही हेतु दिशा निर्देश देने का कष्ट करें या महाविद्यालय में प्रशासक नियुक्त करने का कष्ट करें ।
जिसके लिए हम सभी आप के आभारी रहेंगें ।