“1% से घटाकर 0.50% किया गया शुल्क, व्यापार और उद्योग को मिलेगा फायदा

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कपास पर मंडी शुल्क 1 प्रतिशत से घटाकर 0.50 प्रतिशत किया, किसानों, व्यापारियों और कृषि आधारित उद्योगों को मिलेगी बड़ी राहत-अर्चना चिटनिस।

बुरहानपुर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कपास पर लगने वाले मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत (एक रुपए प्रति सैकड़ा) से घटाकर 0.50 प्रतिशत (50 पैसे प्रति सैकड़ा) करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। प्रदेश सरकार के इस निर्णय से कपास उत्पादक किसानों, व्यापारियों तथा कृषि आधारित उद्योगों को बड़ी राहत मिलेगी।

 

इस निर्णय से न केवल बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, इंदौर, आलीराजपुर, झाबुआ, छिंदवाड़ा, बैतूल, सिवनी, क्षेत्र बल्कि संपूर्ण प्रदेश के कपास उत्पादक किसानों और कपास आधारित उद्योगों को लाभ होगा। मंडी शुल्क कम होने से प्रदेश का कपास अधिक मात्रा में मध्यप्रदेश की जिनिंग, प्रेसिंग एवं प्रसंस्करण इकाइयों तक पहुंचेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर उत्पादन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे विधायक एवं पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) की सक्रिय पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने 6 मई 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बुरहानपुर प्रवास के दौरान आयोजित उद्यमी संवाद कार्यक्रम में कपास पर मंडी शुल्क कम करने का विषय प्रमुखता से उठाया था। श्रीमती चिटनिस ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया था कि महाराष्ट्र की तुलना में अधिक मंडी शुल्क होने से प्रदेश के किसान, व्यापारी एवं जिनिंग उद्योग प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कपास पर मंडी शुल्क कम कर किसानों और उद्योगों को राहत देने का आग्रह किया था।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए मंत्रिपरिषद की बैठक में शुल्क में कमी का निर्णय लिया। यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने, कपास व्यापार को प्रोत्साहित करने तथा कृषि आधारित गतिविधियों को मजबूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

श्रीमती अर्चना चिटनिस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय केवल किसानों को राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला निर्णय है। उन्होंने कहा कि मंडी शुल्क में कमी से कपास आधारित जिनिंग, प्रेसिंग एवं प्रसंस्करण इकाइयों को लाभ मिलेगा। वर्षों से बंद या प्रभावित पड़ी अनेक इकाइयों के पुनः शुरू होने की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

 

उन्होंने कहा कि इस निर्णय से कपास का व्यापार बढ़ेगा, किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा और प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों को नई मजबूती प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों, व्यापारियों और श्रमिकों के हित में लगातार प्रभावी निर्णय लेकर प्रदेश के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

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