दिव्य दुग्धाभिषेक में उमड़ा आस्था का सैलाब सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने संत भवन व सभा मंडप के लिए 5 लाख रुपये देने की की घोषणा
200 वर्ष प्राचीन स्वामीनारायण मंदिर में 27वें दिन भी अविरल दुग्धधारा, शाकोत्सव में सब्जियों का भोग अर्पित
बुरहानपुर।
सीलमपुरा स्थित 200 वर्ष प्राचीन श्री स्वामीनारायण मंदिर में चल रहे पुरुषोत्तम मास महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को 27वें दिन भी भगवान लक्ष्मीनारायण देव एवं हरिकृष्ण महाराज का पंचद्रव्य, दुग्ध, घृत, शर्करा, मधु एवं नारियल जल से दिव्य अभिषेक किया गया। प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ दर्शन एवं अभिषेक का लाभ लेने मंदिर पहुंचने लगी।
इस अवसर पर सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल एवं महापौर माधुरी पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहै। दोनों जनप्रतिनिधियों ने भगवान के समक्ष किसानों की समृद्धि, अच्छी फसल तथा जिलेवासियों के सुख, शांति और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की। सांसद श्री पाटिल ने कहा कि लगातार प्राकृतिक आपदाओं एवं मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों से किसान वर्ग प्रभावित हो रहा है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा से किसानों को समृद्धि एवं सुरक्षा प्राप्त हो, यही उनकी कामना है।
संत भवन एवं सभा मंडप के लिए सांसद निधि से 5 लाख की घोषणा
अभिषेक के दौरान सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने मंदिर परिसर में निर्माणाधीन संत भवन एवं सभा मंडप के लिए सांसद निधि से 5 लाख रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सफल 12 वर्षों के कार्यकाल की सराहना करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की भी कामना की।
अभिषेक की अविरल धारा देखकर भावविभोर हुईं महापौर
महापौर माधुरी पटेल ने भी भगवान लक्ष्मीनारायण देव एवं हरिकृष्ण महाराज का दुग्धाभिषेक कर पूजा-अर्चना एवं आरती का लाभ लिया। भगवान के दिव्य स्वरूप और अविरल दुग्धधारा के दर्शन कर वे भावविभोर हो गईं। उन्होंने नगरवासियों के सुख, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना की।
मनुष्य जीवन का लक्ष्य भगवान की प्राप्ति : चैतन्य ब्रह्मचारी
इस अवसर पर वड़ोदरा से पधारे चैतन्य ब्रह्मचारी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य जन्म का वास्तविक उद्देश्य भगवान की प्राप्ति है। उन्होंने कहा कि भगवान की सेवा, भक्ति और समर्पण से ही जीवन सार्थक बनता है। श्री स्वामीनारायण भगवान की मूर्तियां केवल प्रतिमाएं नहीं, बल्कि भक्तों के लिए साक्षात प्रगट परमात्मा का स्वरूप हैं। उन्होंने कहा कि जहां भगवान को श्रद्धा एवं प्रेम से भोग अर्पित किया जाता है, वहां आध्यात्मिक उन्नति एवं अक्षरधाम की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। धर्म के मार्ग पर चलने से व्यक्ति को केवल संपत्ति ही नहीं, बल्कि श्रेष्ठ संस्कारों की भी प्राप्ति होती है।
सेवा, सत्संग और भगवान के नाम में ही कल्याण : चिंतनप्रियदासजी स्वामी
स्वामी शास्त्री चिंतनप्रियदासजी ने अपने प्रवचन में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान अपने भक्तों के प्रेम से बंध जाते हैं। उन्होंने माखन चोरी की लीलाओं एवं गोपियों के प्रेम का वर्णन करते हुए बताया कि भगवान का प्रत्येक कार्य भक्तों को भक्ति, प्रेम और समर्पण का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भगवान के नाम, सेवा और सत्संग से ही जीवन का वास्तविक कल्याण संभव है तथा ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का सर्वोत्तम साधन निष्काम भक्ति है।
सब्जियों के भोग के साथ मनाया गया शाकोत्सव
मंदिर में भगवान को विभिन्न प्रकार की लगभग सैकड़ो सब्जियों का भोग अर्पित कर भव्य शाकोत्सव मनाया गया। श्रद्धालुओं ने अपनी श्रद्धा और भक्ति के अनुसार विविध प्रकार की सब्जियां भगवान को अर्पित कीं। स्वामीनारायण परंपरा में शाकोत्सव को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। सामान्यतः देवउठनी एकादशी के अवसर पर इस प्रकार का महाभोग लगाया जाता है, किंतु अधिक पुरुषोत्तम मास में भी भगवान को प्रसन्न करने के लिए यह विशेष उत्सव आयोजित किया जाता है। शाकोत्सव के दर्शन कर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो उठे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत, हरिभक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।