
58वाँ शहज़ादा आसिफ़ मुमताज़ महल महोत्सव संपन्न
इतिहास, संस्कृति और विरासत के संरक्षण का लिया गया संकल्प
बुरहानपुर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक विरासत को समर्पित 58वाँ शहज़ादा आसिफ़ ख़ाँ मुमताज़ महल महोत्सव विविध कार्यक्रमों के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
नगरवासियों के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में इतिहास, साहित्य, संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और विरासत संरक्षण के विविध आयामों को प्रस्तुत किया गया।
महोत्सव का शुभारंभ अम्बर होटल, बुरहानपुर में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी से हुआ। संगोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता श्री फ़रीद अहमद ने की।
इस वर्ष संगोष्ठी का विषय “History to Hashtag : Roots and Wings” रखा गया था, जिसमें इतिहास, विरासत और डिजिटल युग के अंतर्संबंधों पर सार्थक चर्चा हुई।
संगोष्ठी में श्री ताहिर नक़्क़ाश, डॉ. फ़रज़ाना अंसारी, डॉ. वासिफ़ यार, श्री होशंग हवालदार, सुश्री नेहा गोडघाटे तथा श्रीमती प्रीति राठौड़ ने अपने शोधपत्र एवं विचार प्रस्तुत किए।
वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि नई पीढ़ी को इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए आधुनिक तकनीक एवं सोशल मीडिया के माध्यम से वैश्विक संवाद स्थापित किया जा सकता है।
संगोष्ठी के पश्चात राजा जयसिंह की छत्री एवं पान बाग़, ज़ैनाबाद में सर्वधर्म प्रार्थना सभा आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने शांति, सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
महोत्सव का मुख्य आकर्षण सायंकाल गुलमोहर मार्केट, बुरहानपुर में आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा एवं कवि सम्मेलन रहा। कार्यक्रम की अध्यक्षता देश के प्रतिष्ठित कवि श्री अशोक मिज़ाज बद्र ने की, जो पद्मश्री बशीर बद्र के शिष्य हैं। देश के विभिन्न राज्यों से आए कवियों एवं शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से प्रेम, मानवीय संवेदनाओं, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया।
मुशायरे एवं कवि सम्मेलन में श्री अशोक मिज़ाज बद्र, श्री पंकज पलाश, श्रीमती ज्योति जलज, सुश्री नेहा गोडघाटे, श्री आदिल नैय्यर, श्री शकील कुरैशी, श्री ताहिर नक़्क़ाश, श्री नईम राशिद, श्री मजाज़ आश्ना, सलीम सुताल तथा अनवर माही ने अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। कार्यक्रम को लगभग 20 हजार श्रोताओं की अभूतपूर्व उपस्थिति प्राप्त हुई, जिसने इसे ऐतिहासिक सफलता प्रदान की।
राष्ट्रीय चेतना और भारतीयता के प्रतीक के रूप में संगोष्ठी तथा मुशायरे के मंच पर अशोक स्तंभ, भारत के राष्ट्रीय प्रतीक, को स्थापित किया गया। इस अवसर पर आयोजित शपथ-विधि में उपस्थित जनसमूह ने देश की ऐतिहासिक धरोहरों, पुरातात्त्विक स्मारकों एवं सांस्कृतिक विरासत की रक्षा, स्वच्छता और संरक्षण का संकल्प लिया। साथ ही महात्मा गांधी के स्वप्नों के अनुरूप स्वच्छ, सुंदर और जागरूक भारत के निर्माण हेतु सक्रिय योगदान देने की शपथ भी ग्रहण की।
उल्लेखनीय है कि यह महोत्सव प्रतिवर्ष 7 जून को आयोजित किया जाता है, किंतु इस वर्ष सूफ़ी संत हज़रत दादा मियाँ नज़ीर चिश्ती के उर्स के कारण इसका आयोजन 20 जून 2026 को किया गया।
महोत्सव की सफलता में पुलिस विभाग, नगर निगम, अधिवक्ता समुदाय, चिकित्सकों, श्रमिकों, शिक्षाविदों, कलाकारों, व्यापारियों, फिल्म निर्माताओं तथा समाज के विभिन्न वर्गों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विशेष रूप से फिल्म निर्माता श्री तबरेज़ ख़ान एवं श्री फ़रहान ख़ान का सहयोग उल्लेखनीय रहा।
कार्यक्रम की सफलता में श्री शम्मी देवड़ा, श्री कपिल, श्री नौशाद अहमद, श्री अजय रघुवंशी, श्री अकील औलिया, श्री फ़हीम हाशिम, श्री मुन्ना यादव, श्री हनीफ़ बुरहानपुरी (जलेबी वाले), श्री टोनी कीर, श्री मंगल श्रॉफ, श्री उबैद शेख, श्री निसार पोस्टमैन, श्री शब्बीर अमिताभ, श्री नवेद ख़ान, श्री मुस्तफ़ा ख़ान, श्री आदित्य वीर सिंह तथा श्री हर्षित सिंह ठाकुर सहित बुरहानपुर के अनेक गणमान्य नागरिकों का सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ, जिनके योगदान से महोत्सव का सफल एवं गरिमामय आयोजन संभव हो सका।
महोत्सव के संस्थापक शहज़ादा आसिफ़ ख़ाँ ने अपने धन्यवाद ज्ञापन में सभी अतिथियों, वक्ताओं, कवियों, शायरों, प्रशासनिक अधिकारियों, सामाजिक संगठनों, मीडिया प्रतिनिधियों एवं नगरवासियों का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुमताज़ महल महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बुरहानपुर की गौरवशाली ऐतिहासिक विरासत, गंगा-जमुनी तहज़ीब और राष्ट्रीय एकता का उत्सव है। उन्होंने भविष्य में भी इसी उत्साह और जनसहभागिता के साथ इस परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प व्यक्त किया।
प्रख्यात शायर एवं साहित्यकार डॉ. वासिफ़ यार महोत्सव के संयोजक एवं मंच संचालक रहे। उन्होंने कहा कि इतिहास, संस्कृति और विरासत के संरक्षण की भावना को जन-जन तक पहुँचाना ही इस महोत्सव का मूल उद्देश्य है तथा यही इसकी निरंतर सफलता का आधार भी है।