फौजी को भी नहीं मिला न्याय! पिता की जमीन बचाने पुलवामा से बुरहानपुर पहुंचा आर्मी जवान

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बुरहानपुर

देश की सरहद पर तैनात एक आर्मी जवान जब

अपने ही घर की जमीन बचाने के लिए छुट्टी लेकर कश्मीर के पुलवामा से बुरहानपुर

पहुंचता है, तो यह सवाल खड़ा करता है कि आम नागरिक को

न्याय पाने के लिए आखिर कितने दरवाजे खटखटाने पड़ते हैं। ऐसा ही एक मामला

बुरहानपुर जिले से सामने आया है, जहां पुलवामा में

पदस्थ आर्मी जवान शुभम अपने पिता रमेश बक्सू के साथ कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई

में न्याय की गुहार लगाने पहुंचे।

पीड़ित रमेश बक्सू

ने बताया कि उनके नाम से पातोंडा पुलिस लाइन के पास ग्राम रसुलपुरा में 20×45 फीट की जमीन दर्ज है, जो कुल 900 स्क्वायर फीट की है। इस जमीन की विधिवत रजिस्ट्री भी उनके

पास मौजूद है। आरोप है कि पड़ोसी मो. रईस ने धोखाधड़ी और अवैध तरीके से इस जमीन को

बाख दिया, जिसके बाद जिसने जमींन खरीदी उसने उस जगह पर मकान का निर्माण भी करवा

लिया। इतना ही नहीं, रमेश बक्सू का कहना है कि उनकी जमीन को

बिना उनकी सहमति के बेचने का प्रयास भी किया गया।

रमेश बक्सू ने

बताया कि वे पिछले काफी समय से इस मामले को लेकर परेशान हैं। उन्होंने थाने में भी

शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन वहां से भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं

हुई। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर कार्यालय की जनसुनवाई में कई बार आवेदन दिए, मगर हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही

मिला। सुनवाई आगे नहीं बढ़ने और लगातार निराशा के चलते उनका परिवार मानसिक तनाव

में है।

जब पिता की

शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तब कश्मीर के

पुलवामा में तैनात आर्मी जवान शुभम ने छुट्टी लेकर खुद बुरहानपुर आने का फैसला

किया। जनसुनवाई में पहुंचे शुभम ने कहा कि मैं देश की सेवा के लिए सरहद पर तैनात

हूं, लेकिन मेरे पिता को अपने ही घर की जमीन

के लिए भटकना पड़ रहा है। पिछले कई महीनों से वे अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। मजबूर

होकर मुझे 15 दिन की छुट्टी लेकर यहां आना पड़ा।

आर्मी जवान शुभम

ने आरोप लगाया कि मो. रईस ने जबरन और अवैध तरीके से उनकी जमीन पर कब्जा किया है।

उन्होंने कहा कि हमारे पास जमीन की रजिस्ट्री है, सारे दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद हमारी जमीन पर मकान

बना लिया गया और हमारी जमीन को बेचने की कोशिश भी की गई। यह सरासर अन्याय है।

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