मंत्री नितेश राणे के कथित आपत्तिजनक बयान की प्रो. डॉ. रिजवान खान ने की कड़ी निंदा; आरोप साबित करें, अन्यथा इस्तीफा दें!

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मंत्री नितेश राणे के कथित आपत्तिजनक बयान की प्रो. डॉ. रिजवान खान ने की कड़ी निंदा; आरोप साबित करें, अन्यथा इस्तीफा दें

“मुस्लिम समाज की बदनामी बर्दाश्त नहीं की जाएगी; आरोपों के ठोस सबूत हैं तो उन्हें जनता के सामने पेश करें!”

बुलढाणा :

रिपोर्ट लियाकत खान 

 

महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे द्वारा मुस्लिम समाज के संबंध में दिए गए कथित आपत्तिजनक बयानों की प्रो. डॉ. रिजवान खान (महाराष्ट्र प्रदेश कार्याध्यक्ष, मुस्लिम वेलफेयर एसोसिएशन) ने कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा दी जाने वाली वस्तुओं में थूकने तथा मुस्लिम समाज द्वारा धार्मिक कर्तव्य के रूप में दी जाने वाली जकात की राशि का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए किए जाने जैसे आरोप लगाए जाते हैं, तो उन्हें ठोस और विश्वसनीय सबूतों के साथ साबित करना आवश्यक है।

प्रो. डॉ. रिजवान खान ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “आरोप लगाना आसान है, लेकिन उन्हें साबित करने की जिम्मेदारी भी आरोप लगाने वाले की ही होती है!”

उन्होंने कहा कि मंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने वाले व्यक्ति को सार्वजनिक बयान देते समय संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और सभी धर्मों के नागरिकों के सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। किसी व्यक्ति के कथित कृत्य के आधार पर पूरे मुस्लिम समाज को दोषी ठहराना अन्यायपूर्ण है। किसी भी समाज के संबंध में आरोप लगाने से पहले वस्तुनिष्ठ और ठोस सबूत प्रस्तुत करना आवश्यक है।

नितेश राणे को खुली चुनौती

प्रो. डॉ. रिजवान खान ने मंत्री नितेश राणे को खुली चुनौती देते हुए कहा, “आपने मुस्लिम समाज के संबंध में जो आरोप लगाए हैं, उन्हें ठोस और विश्वसनीय सबूतों के साथ साबित करके दिखाइए। यदि आपके आरोपों में सच्चाई है, तो सबूत जनता के सामने पेश कीजिए। लेकिन यदि आप अपने आरोप साबित नहीं कर पाते हैं, तो नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने मंत्री पद से इस्तीफा दीजिए। पूरे समाज को बदनाम करके अपनी जिम्मेदारी से बचना उचित नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत की असली ताकत विविधता में एकता, धार्मिक सहिष्णुता, भाईचारे और संविधान द्वारा दिए गए समानता के अधिकार में निहित है। धार्मिक आधार पर समाज में संदेह और गलतफहमियां पैदा करने वाले बयान सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए सार्वजनिक जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को अपने शब्दों और बयानों के परिणामों की जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।

मुस्लिम समाज के योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

प्रो. डॉ. खान ने कहा कि मुस्लिम समाज ने देश के शैक्षणिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। किसी भी समाज को ठोस सबूतों के बिना दोषी ठहराना न्याय और संवैधानिक समानता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जकात की राशि के इस्तेमाल को लेकर यदि कोई आरोप लगाए जाते हैं, तो उनकी सत्यता की जांच ठोस सबूतों के आधार पर होनी चाहिए। बिना प्रमाण पूरे समाज पर आरोप लगाना उचित नहीं है।

संविधान का सम्मान और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार का उपयोग करते समय जिम्मेदारी, संयम और सामाजिक सौहार्द का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। किसी धर्म या समाज के खिलाफ अप्रमाणित आरोप लगाकर जनता के बीच गलतफहमियां पैदा नहीं की जानी चाहिए।

सार्वजनिक जीवन में नफरत के बजाय संवाद, धार्मिक तनाव के बजाय भाईचारे और निराधार आरोपों के बजाय ठोस सबूतों को महत्व दिया जाना चाहिए।

प्रो. डॉ. रिजवान खान ने कड़े शब्दों में कहा, “मुस्लिम समाज को बदनाम करने वाले बयानों को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। यदि आरोप हैं, तो उन्हें ठोस सबूतों के साथ साबित कीजिए; अन्यथा नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार कीजिए। संविधान, सामाजिक न्याय और सभी धर्मों के लोगों के सम्मान की रक्षा के लिए हमारी आवाज लगातार उठती रहेगी।”

 

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