मां बच्चों संग लगाने जा रही थी मौत की छलांग, पुलिस ने ऐन वक्त पर थामा हाथ जनसेवा का जज्बा: पुलिस ने सूझबूझ और

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पुलिस की तत्परता नें बचाई एक महिला व दो बच्चो की जान

 

ताप्ती छोटा पुल सही समय पर पहुंचकर पुलिस ने पारिवारिक कलह से त्रस्त महिला और दो मासूम बच्चों को आत्महत्या करने से बचाया

 

प्रशासनिक तत्परता और सूझबूझ से टला बड़ा हादसा; लालबाग पुलिस व राजस्व टीम ने ऐन वक्त पर महिला का हाथ थामकर मौत के मुंह से निकाला

 

रेस्क्यू के बाद तत्काल काउंसलिंग कर सुरक्षित माहौल में शिकारपुरा थाने के माध्यम से पति के सुपुर्द किया गया

 

एक महिला अपने दो छोटे बच्चों के साथ घरेलू विवाद व पारिवारिक कलह से अत्यधिक परेशान होकर आत्मघाती कदम उठाने के उद्देश्य से छोटा ताप्ती ब्रिज पर पहुंची थी।

 

अत्यधिक मानसिक तनाव की स्थिति में वह अपने दोनों मासूम बच्चों को साथ लेकर पुल के बीचों-बीच रेलिंग के पास कूदने के लिए तैयार खड़ी हो गई थी।

 

 

राहगीरों और स्थानीय सूत्रों से जैसे ही इस संवेदनशील स्थिति की भनक लगी, वैसे ही क्षेत्र में कानून-व्यवस्था व सुरक्षा हेतु तैनात प्रशासनिक अमला बिना एक क्षण गंवाए सक्रिय हो उठा।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए लालबाग थाना निरीक्षक अमित सिंह जादौन, तहसीलदार प्रवीण ओहरिया और नायब तहसीलदार नीतू मंडलोई की संयुक्त टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला।

 

उनके साथ थाना लालबाग से प्रधान आरक्षक क्रमांक 372 भरत देशमुख, आरक्षक 107 नितेश सपकाडे, आरक्षक नन्नूलाल मीणा तथा आरक्षक सचिन वालसिंगे तत्काल मौके पर पहुंचे। पुल पर स्थिति बेहद नाजुक थी; जरा सी जल्दबाजी या चिल्लाहट महिला को भयभीत कर सकती थी और वह नदी में कूद सकती थी।

 

 

टीम ने एक विशेष मनोवैज्ञानिक रणनीति अपनाई। अधिकारियों ने एक ओर जहां महिला से संवेदनशीलता के साथ बातचीत शुरू कर उसका ध्यान भटकाया, वहीं दूसरी ओर आरक्षकों की टीम ने अत्यंत सावधानी और फुर्ती से घेराबंदी की।

 

 

जैसे ही महिला का ध्यान थोड़ा भटका, पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए महिला और दोनों बच्चों को सुरक्षित पकड़ लिया और उन्हें रेलिंग से खींचकर सुरक्षित स्थान पर ले आए। इसके पश्चात, मामले के स्थायी समाधान हेतु थाना शिकारपुरा से संपर्क स्थापित किया गया।

 

 

महिला और उसके बच्चों को उनके पति पप्पू भिलाला के साथ डायल 112 वाहन के माध्यम से पूरी सुरक्षा के साथ शिकारपुरा रवाना किया गया, ताकि उनके पारिवारिक विवाद को सुलझाकर सुखद पुनर्वास सुनिश्चित किया जा सके।

 

सराहनीय भूमिका निरीक्षक अमित सिंह जादौन, तहसीलदार  प्रवीण ओहरिया, नायाब तहसीलदार नीतू मंडलोई सहित प्रधान आरक्षक 372 भरत देशमुख, आरक्षक 107 नितेश, आरक्षक नन्नूलाल मीणा और आरक्षक सचिन वालसिंगे की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। पुलिसकर्मियों द्वारा सही समय पर प्रदर्शित किए गए साहस, धैर्य और सूझबूझ की उच्च अधिकारियों और आम जनता द्वारा प्रशंसा की जा रही है।

 

जनसेवा और सुरक्षा का संकल्पः संकट के हर क्षण में आपकी पुलिस सदैव आपके साथ है।

 

 

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