कृषि विभाग द्वारा 20 क्लस्टरों के माध्यम से किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति किया जा रहा प्रेरित
बुरहानपुर, प्रदेश सहित जिले में ‘‘कृषक कल्याण वर्ष के तहत विभिन्न गतिविधियां की जा रही है। इसी कड़ी में कृषि विभाग द्वारा किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से 20 क्लस्टरों का गठन किया गया है। इन क्लस्टरों के माध्यम से किसानों के खेतों पर पहुँचकर प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उपसंचालक कृषि श्री एम.एस. देवके ने जानकारी देते हुए बताया कि एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजर श्री अनिल रावत द्वारा ग्राम कालमाटी में फील्ड स्तर पर किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत सहित प्राकृतिक खेती के सभी घटकों को खेत पर तैयार करने की विधि सिखाई जा रही है। साथ ही पौधों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने तथा फसल सुरक्षा हेतु प्राकृतिक उपायों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
जिले में फील्ड अधिकारियों के माध्यम से प्राकृतिक खेती को प्रभावी रूप से लागू करवाया जा रहा है। किसानों से अपील की जा रही है कि वे कम से कम एक एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती अवश्य अपनाएं।
वहीं किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है। यह भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके अंतर्गत किसानों को उनकी मिट्टी के पोषण स्तर (12 प्रमुख मापदंडों) एवं आवश्यक उर्वरक मात्रा की रिपोर्ट प्रदान की जाती है। यह योजना प्रत्येक 2-3 वर्ष में मिट्टी परीक्षण के माध्यम से फसल उत्पादन बढ़ाने और अनावश्यक उर्वरक खर्च कम करने में सहायक है। किसानों से आग्रह है कि वे अपनी मिट्टी की जांच अवश्य करवाएं और खेती की लागत (कॉस्ट ऑफ कल्टीवेशन) कम करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाएं।
प्राकृतिक खेती एक संतुलित एवं भविष्य उन्मुख खेती पद्धति है। इससे पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि तथा लाभदायक सूक्ष्म जीवों जैसे केंचुए (किसान का मित्र) का संरक्षण होता है। इसके साथ ही लाभकारी कीट जैसे लेडीबग, लेसविंग, परजीवी ततैया, ग्राउंड बीटल एवं हॉवरफ्लाई हानिकारक कीटों (एफिड्स, माइट्स, कैटरपिलर आदि) को नियंत्रित कर फसल सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्राकृतिक खेती से उत्पादित अनाज, दालें, फल एवं सब्जियां पोषक तत्वों से भरपूर एवं सुरक्षित होती हैं, जिन्हें किसान कम लागत में अपने खेत पर तैयार कर सकते हैं। विभाग द्वारा किसानों से अधिक से अधिक संख्या में प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की जा रही है, ताकि सतत एवं सुरक्षित कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल सके।