
टीईटी परीक्षा 2026 को लेकर शिक्षकों की बैठक, पुरजोर विरोध का निर्णय
बुरहानपुर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) 2026 को लेकर शिक्षकों में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है।
इसी विषय पर शिक्षकों की एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रस्तावित टीईटी परीक्षा का पुरजोर विरोध करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में उपस्थित शिक्षकों ने कहा कि हाल ही में लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार शिक्षकों को टीईटी परीक्षा में सम्मिलित होने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे प्रदेश के लगभग 1.5 लाख शिक्षक-शिक्षिकाएँ प्रभावित हो रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि प्रदेश में वर्ष 1998 से 2010 के बीच नियुक्त शिक्षक तत्कालीन विभागीय नियमों के अनुसार नियुक्त हुए थे।
इसके अतिरिक्त वर्ष 2005 एवं 2008 में आयोजित संविदा शाला शिक्षक, शिक्षाकर्मी तथा गुरुजी की पात्रता परीक्षाएँ उत्तीर्ण करने के पश्चात ही उनकी नियुक्ति की गई थी।
वहीं वर्ष 2011 के बाद नियुक्त शिक्षक भी टीईटी उत्तीर्ण कर चयनित हुए हैं और पिछले लगभग 20–30 वर्षों से निरंतर अध्यापन कार्य कर रहे हैं।
बैठक में यह भी मांग की गई कि राज्य सरकार, उत्तरप्रदेश सरकार की भांति इस विषय में माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करे तथा अंतिम निर्णय आने तक टीईटी परीक्षा को स्थगित किया जाए।
बैठक में मुख्य रूप से राज्य अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री शालिकराम चौधरी, पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन की प्रदेश सचिव श्रीमती प्रमिला सगरे, प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष संतोष निंभोरे, प्रवक्ता अतुल उईके, जिला कोषाध्यक्ष जयराम निराले, अरुण पवार, चारुलता जोशी, किरण काले, किशन सिंह सिसोदिया, ममता महाजन, ज्योत्सना कनसिया , कमलेश लौखंडे, रीना वानखेड़े, केतन तारे, निशा भोंडेकर, प्रमिला यवतकर सहित अन्य शिक्षकगण उपस्थित थे।
बैठक में सभी शिक्षकों ने एकमत होकर निर्णय लिया कि यदि सरकार द्वारा इस आदेश पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो आगामी समय में शिक्षक संगठनों द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन किया।