
अवार्ड वाला ‘नल-जल’ हुआ फेल! बुरहानपुर के गांवों में सूखे नल, बूंद-बूंद को तरसती जनता
आसमान से बरसती आग, प्यासी धरती और सूखे नल—यह तस्वीर है मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के ग्रामीण अंचलों की, जहां भीषण गर्मी के बीच लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हैं। एक ओर जिला ‘नल-जल योजना’ के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अवार्ड हासिल कर चुका है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
ग्राम तुकाईथड़ में हालात बेहद चिंताजनक हैं। यहां के नलों में पानी नहीं आ रहा, जिससे ग्रामीणों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है। महिलाओं और बच्चों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना केवल कागजों तक सीमित है, जबकि वास्तविकता में उन्हें पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी नवलसिंग, रशीदा, संजय पचौरी, महेंद्र मालवीय, जगदीश यादव और अजय साटोटे का कहना है कि कई बार सरपंच और सचिव को समस्या बताई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समाधान नहीं निकल पाया।
इधर, क्षेत्र में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई भी चिंता का विषय बन गई है। पर्यावरण संतुलन बिगड़ने से जल स्रोत सूखते जा रहे हैं, जिससे संकट और गहरा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और भी बदतर हो सकते हैं।
यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब योजनाएं और अवार्ड मौजूद हैं, तो आखिर जनता तक उनका लाभ क्यों नहीं पहुंच रहा? क्या विकास केवल कागजों में सिमट कर रह जाएगा?
अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन इन बेबस ग्रामीणों की प्यास बुझाने के लिए क्या कदम उठाता है, या फिर यह संकट यूं ही गहराता रहेगा।