TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने तहसीलदार को सौंपा आवेदन
RTE एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से मुक्त रखने की मांग
बुरहानपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा द्वारा तहसीलदार प्रवीण ओहरियाजी को आवेदन/ज्ञापन सौंपा गया। इसमें RTE एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से मुक्त रखने की मांग की गई।
मोर्चे ने कहा कि RTE एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा लागू करने का कोई प्रावधान नहीं था। वर्ष 2017 के संशोधन में भी पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET के दायरे में लाने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं जोड़ा गया। तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर द्वारा संसद में दिए गए वक्तव्य से भी यह स्पष्ट होता है कि संशोधन का उद्देश्य शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए किया गया था।
शिक्षक संगठनों ने कहा कि 20–30 वर्षों से सेवाएं दे रहे शिक्षकों का सेवा अभिलेख अनुभव एवं कार्यक्षमता का प्रमाण है। इन शिक्षकों ने विपरीत परिस्थितियों में भी विद्यार्थियों को बेहतर परिणाम दिए हैं। ऐसे अनुभवी शिक्षकों को वर्षों की सेवा के बाद पुनः परीक्षा के नाम पर भय और असुरक्षा के वातावरण में रखना अव्यावहारिक एवं निराशाजनक है।
मोर्चे के प्रदेश संयोजक श्री शालिकराम चौधरी ने कहा कि लंबे समय से सेवा कर रहे किसी भी कर्मचारी की पुनः पात्रता परीक्षा ली जाए तो शत-प्रतिशत परिणाम की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व भी बढ़ते हैं और नियमित सेवा के साथ परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय निकालना कठिन होता है। इसलिए पूर्व नियुक्त अनुभवी शिक्षकों को TET से मुक्त किया जाना चाहिए।
शिक्षक संगठनों ने यह भी कहा कि 1 सितंबर 2025 के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लेकर शिक्षकों में भय और असमंजस का वातावरण निर्मित हो रहा है। शिक्षक अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन भयमुक्त वातावरण में कर सकें, इसके लिए सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
शिक्षक संगठनों ने मांग की कि शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक एवं गुरुजी आदि के रूप में वर्षों पूर्व नियुक्त शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता प्रदान की जाए तथा उसके आधार पर सभी आर्थिक एवं अनार्थिक लाभ दिए जाएं। साथ ही पात्र शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना का लाभ प्रदान करने, ई-अटेंडेंस जैसी अव्यावहारिक व्यवस्था को बंद करने तथा अनुभवी पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से मुक्त कराने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई।
मोर्चे ने आग्रह किया कि वर्षों से शिक्षा व्यवस्था को अपनी सेवाएं दे रहे अनुभवी शिक्षकों के हित में संवेदनशील एवं सकारात्मक निर्णय लेकर TET की अनिवार्यता से उन्हें मुक्त किया जाए, ताकि शिक्षक भयमुक्त होकर अपने शैक्षणिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
इस अवसर पर संतोष निंभोरे, धर्मेंद्र चौकसे जयराम निराले, प्रमोद साताव, सुनील सातव विजेश राठौड, अनिल बावीस्कर, संजय भोलानकर, शिवलाल कुशवाहा, प्रमोद महाजन, संजय पवार, भानुदास भंगाले, रेहान अनवर, मुश्ताक खान, शेख बाबू, बबिता श्रीवंश, रत्नप्रभा उईके ज्योति पाटील मोहम्मद शाकिर कमलेश लोखंडे सहित अनेक शिक्षक उपस्थित रहे।