TET के विरोध में शिक्षकों की न्याय यात्रा, मां ताप्ती के दरबार में लगाई न्याय की गुहार

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सूर्यपुत्री मां ताप्ती से शिक्षक मांगा न्याय, शनि देव-हनुमान की पूजा से शुरू हुई न्याय यात्रा

TET के विरोध में शहर में गूंजे नारे, राजघाट पर मां ताप्ती को चुनरी ओढ़ाकर की प्रार्थना

बुरहानपुर, 13 सितंबर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के विरोध में मध्य प्रदेश प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय आह्वान पर रविवार को बुरहानपुर में न्याय यात्रा निकाली गई। यात्रा का शुभारंभ शनि देव एवं हनुमान जी की पूजा-अर्चना से हुआ। शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए यात्रा राजघाट पहुंची। इस दौरान शिक्षकों ने “शिक्षक पात्रता परीक्षा जैसा काला कानून वापस लो” और “शिक्षक पात्रता परीक्षा रद्द करो” के नारे लगाए।

राजघाट पहुंचने पर शिक्षकों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद सूर्यपुत्री मां ताप्ती को चुनरी ओढ़ाकर पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार मां ताप्ती के दर्शन एवं स्मरण से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के साथ शिक्षकों ने मां ताप्ती से न्याय की गुहार लगाते हुए केंद्र सरकार एवं सर्वोच्च न्यायालय को सद्बुद्धि देने तथा शिक्षकों के हित में निर्णय होने की प्रार्थना की।

जिला अध्यक्ष संतोष निंभोरे ने कहा कि शनि देव को कर्मफलदाता और न्याय के देवता के रूप में माना जाता है। इसी भाव के साथ न्याय की प्रार्थना करते हुए यात्रा शुरू की गई। उन्होंने कहा कि “शिक्षक अपनी योग्यता केवल किसी एक परीक्षा से नहीं, बल्कि अपनी शैक्षणिक योग्यता, वर्षों के अनुभव और निरंतर सेवाकाल में निभाए गए दायित्वों से सिद्ध करता आया है। 45, 50 और 55 वर्ष की उम्र पार कर चुके अनुभवी शिक्षकों से पुनः पात्रता परीक्षा लेना न्यायसंगत नहीं है।”

उन्होंने कहा कि शिक्षक वर्षों से विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में जुटे हैं। अपने सेवाकाल में उन्होंने न केवल शिक्षण कार्य किया, बल्कि शासन द्वारा सौंपे गए विभिन्न दायित्वों का भी जिम्मेदारी से निर्वहन किया है। ऐसे में लंबे सेवाकाल के बाद पुनः पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता शिक्षकों के सम्मान और अनुभव पर प्रश्न खड़ा करती है।

“जनगणना और चुनाव जैसे कार्य प्रशिक्षण लेकर सफलतापूर्वक कराते रहे शिक्षक”

संघ के प्रवक्ता अतुल उईके एवं आई टी सेल प्रभारी गोपाल धारकर ने कहा कि “सरकार शिक्षकों को छोटे-छोटे प्रशिक्षण देकर जनगणना, चुनाव सहित अनेक महत्वपूर्ण कार्य करवाती रही है। शिक्षक इन जिम्मेदारियों को हमेशा पूरी निष्ठा और सफलता के साथ निभाते आए हैं। जब शासन को आवश्यकता होती है, तब शिक्षक सक्षम और योग्य माने जाते हैं, लेकिन वर्षों की सेवा के बाद पात्रता पर सवाल उठाना समझ से परे है।”

उन्होंने कहा कि शिक्षक वर्ग ने दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन और वंचित परिवारों के बच्चों को शिक्षा देकर उनके भविष्य को संवारा है। आज इन्हीं बच्चों में से अनेक बड़े पदों पर पहुंचकर देश और समाज की सेवा कर रहे हैं। “यह शिक्षकों की योग्यता, मेहनत और समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण है। ऐसे अनुभवी शिक्षकों से पुनः परीक्षा की मांग करना उचित नहीं है। सरकार को इस काले कानून को वापस लेकर शिक्षकों के हित में न्यायपूर्ण निर्णय करना चाहिए।”

“गुरु के ज्ञान और अनुभव पर बार-बार सवाल क्यों?”

संघ पदाधिकारी विजय राठौर एवं संजय अटकड़े ने कहा कि भारतीय परंपरा में गुरु को सदैव ज्ञान और मार्गदर्शन का प्रतीक माना गया है। उन्होंने सवाल किया कि “क्या इतिहास में कभी किसी राजा ने अपने गुरु की परीक्षा लेकर उनके ज्ञान और अनुभव पर प्रश्नचिह्न लगाया था? फिर वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों?”

उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यता पूरी की है और वर्षों की सेवा के दौरान अपनी कार्यक्षमता प्रमाणित की है। ऐसे में अनुभवी शिक्षकों पर पुनः पात्रता परीक्षा थोपने के निर्णय पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।

सरकार से कानून वापस लेने की मांग

संघ ने केंद्र सरकार एवं सर्वोच्च न्यायालय से मांग की कि शिक्षकों की आयु, अनुभव, पूर्व निर्धारित नियुक्ति योग्यता और लंबे सेवाकाल को ध्यान में रखते हुए शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से राहत दी जाए तथा शिक्षकों के हित में न्यायपूर्ण निर्णय लिया जाए।

न्याय यात्रा के समापन पर शिक्षकों ने मां ताप्ती के पावन तट पर सामूहिक रूप से प्रार्थना करते हुए कहा कि मां ताप्ती उन्हें न्याय दिलाएं और शासन तथा न्याय व्यवस्था को शिक्षकों के हित में उचित निर्णय लेने की प्रेरणा दें।

न्याय यात्रा में संघ के गोपाल धारकर, अतुल उईके, जयराम निराले, गणेश काकड़े, राजकुमार भिलावेकर, विजय राठौर, चारुलता जोशी, सरोज पाल, कुसुम वाघ, प्रह्लाद गवले, किरण काले, उमेश रुपेरी, सुनील सातव, अनिल सातव, मुन्ना मुजाल्दे, अनिल महाजन, प्रकाश खत्री, संजय अटकड़े, संजय लहाने, शेख बाबू, शिवलाल कुशवाह सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।

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