दातपहाड़ी जन-विश्वास शिविर में अव्यवस्थाओं पर सवाल, डेढ़ घंटे में चौपाल खत्म; SDM की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

Spread the love

एसडीएम नेपानगर 12 बजे और डीएफओ व डिप्टी कलेक्टर 12:30 बजे के बाद पहुँचे; ‘जन-विश्वास शिविर’ में अधिकारियों की लेटलतीफी बनी चर्चा का विषय।

 

व्यवस्थाओं का अभाव और खानापूर्ति: ग्राम दातपहाड़ी में औपचारिकता बनकर रह गया ‘जन-विश्वास शिविर’

 

बुरहानपुर।

 

प्रशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने, आमजन की समस्याओं के त्वरित निराकरण और शासकीय योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू किए गए ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’ का बुरा हाल देखने को मिला। शुक्रवार को जनपद पंचायत खकनार की ग्राम पंचायत दातपहाड़ी में आयोजित जन-विश्वास शिविर में मुख्य अधिकारियों की लेट-लतीफी और अव्यवस्थाओं के कारण ग्रामीणों को निराशा हाथ लगी।

अधिकतर अधिकारी पहुँचे, पर व्यवस्था नदारद

 

शिविर के लिए सुबह 11 बजे ही ग्रामीण और अधिकतर विभागों के अधिकारी पंचायत परिसर पहुँच गए थे। ग्रामीणों की सुविधा के लिए कुछ विभागों के स्टॉल और आधार कैंप भी लगाए गए थे। लेकिन इतने बड़े आयोजन के बावजूद मौके पर न तो उचित व्यवस्था की गई थी और न ही संवाद के लिए तय कार्ययोजना के अनुसार बैठने या अन्य सुविधाएँ उपलब्ध थीं।

 

प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों की लेटलतीफी

 

जहाँ अधिकांश विभागों के प्रतिनिधि समय पर आ चुके थे, वहीं कार्यक्रम का मुख्य संचालन और ग्रामीणों से सीधा संवाद करने वाले प्रमुख अधिकारी घंटों देरी से पहुँचे:

 

SDM नेपानगर लगभग दोपहर 12 बजे शिविर स्थल पहुँचे।

 

वहीं DFO बुरहानपुर और डिप्टी कलेक्टर तपीश पांडे दोपहर लगभग 12:30 बजे के बाद पहुँचे।

 

आरईएस विभाग के जिला प्रमुख अधिकारी भी लगभग 12 बजे के करीब ही पहुँच सके थे। प्रमुख अधिकारियों के आने के बाद कार्यक्रम ने थोड़ी गति पकड़ी, लेकिन दोपहर 1:30 बजे के करीब (महज डेढ़ घंटे के भीतर) चौपाल संवाद समाप्त कर अधिकारी स्कूलों के निरीक्षण के लिए निकल गए।

 

जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को आड़े हाथों लिया

 

दोपहर पौने दो बजे जब जिला पंचायत अध्यक्ष गंगा मार्को और जिला पंचायत सदस्य अशोक पटेल पहुंचे, तो चौपाल समाप्त हो चुकी थी। रास्ते में कई अधिकारियों की गाड़ियां वापस लौटती दिखीं।

 

इस पर जनप्रतिनिधियों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा:

 

“सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि अधिकारी धरातल पर जाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनें और उनका त्वरित निराकरण करें। लेकिन यहाँ कार्यक्रम तय समय पर शुरू नहीं हुआ, खानापूर्ति कर जल्द समाप्त कर दिया गया और अधिकारी समय से पहले ही निकल गए।”

 

ग्रामीणों का छलका दर्द: “शिविर के बहाने ही सही, रंग-रोगन तो हुआ”

 

चौपाल में उपस्थित ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखीं, जिनमें मुख्य रूप से:

 

पेयजल संकट: गांव में पीने के पानी की गंभीर किल्लत।

सड़क व पुलिया निर्माण: भगवानपुरा में सड़क और पुलिया की जर्जर स्थिति।

आंगनवाड़ी व्यवस्था: बच्चों को मिलने वाले पोषण आहार में अनियमितता।

 

ग्रामीणों ने तंज कसते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग का अस्पताल जो लंबे समय से बंद पड़ा था, इस शिविर के कारण कुछ दिन पहले ही शुरू किया गया। पंचायत भवन में रंग-रोगन और साफ-सफाई भी शिविर के डर से ही हुई है। ग्रामीणों ने मांग की कि प्रशासन हर 4 महीने में कम से कम एक बार ऐसा शिविर जरूर लगाए, ताकि इसी बहाने गांव की व्यवस्थाओं में कुछ सुधार होता रहे।

 

कागजों पर नल-जल योजना के कीर्तिमान, टंकी में एक बूंद पानी नहीं

 

शिविर के दौरान सबसे बड़ी नाकामी जल जीवन मिशन/नल-जल योजना की सामने आई। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में पानी की टंकी बनकर तैयार है और कागजों पर योजना के बड़े-बड़े कीर्तिमान रचे जा चुके हैं, लेकिन आज तक उस टंकी में पानी नहीं पहुंचा।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभाग के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई गई। साथ ही ग्राम पंचायत सचिव को भी चेतावनी दी गई कि मूलभूत सुविधाओं के लिए ग्रामीणों को भटकना न पड़े और पेयजल समस्या का निराकरण प्राथमिकता पर किया जाए।

 

सवालिया निशान

 

जब कार्यक्रम का मुख्य संचालन और संवाद करने वाले जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी ही घंटों देरी से पहुंचेंगे और अव्यवस्थाओं के बीच खानापूर्ति कर चले जाएंगे, तो ‘जन-विश्वास अभियान’ के मूल उद्देश्य पर सवाल उठना स्वाभाविक है। दातपहाड़ी के ग्रामीणों को आज भी अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान का इंतजार है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *