बालाजी मेले में शौर्य और संस्कृति का संगम! अखाड़ों के हैरतअंगेज करतबों ने मोहा मन, तिब्बती नृत्य बना आकर्षण

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भगवान श्री बालाजी मेले में अखाड़ों की युद्धकला और हैरतअंगेज करतबों ने मोहा मन, तिब्बती परंपरा के नृत्य ने बिखेरे सांस्कृतिक रंग।

 

बुरहानपुर। माँ ताप्ती के पावन तट स्थित सतियारा घाट पर भगवान श्री बालाजी महाराज के ऐतिहासिक मेले के द्वितीय दिवस भक्ति, भारतीय संस्कृति और पारंपरिक शौर्य कलाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।

 

भगवान बालाजी ताप्ती उत्सव समिति द्वारा आयोजित मेले में विभिन्न व्यायामशालाओं के बालक-बालिकाओं ने योगाभ्यास, अखाड़ों की लेझिम, बाना-बनेटी की युद्धकला और हैरतअंगेज करतबों का प्रदर्शन कर उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार मुकेश दरबार (जागृति कला केंद्र, नेपानगर) द्वारा श्रीकृष्ण-सुदामा की अटूट मित्रता पर आधारित भावपूर्ण नृत्य-नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

 

इसके साथ ही तिब्बती परंपरा के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति ने मेले में सांस्कृतिक विविधता के रंग बिखेरे। तिब्बती समाज की महिला एवं पुरुष कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से श्रद्धालुओं का दिल जीत लिया।

 

विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी), कलेक्टर विवेक कुमार, जिला पुलिस अधीक्षक आशुतोष बागरी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सृजन वर्मा आदि ने विभिन्न व्यायामशालाओं के प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया तथा अखाड़ों के उस्तादों का स्वागत-सम्मान कर उनकी कला और परंपरा के संरक्षण में योगदान की सराहना की।

 

मेले में विभिन्न अखाड़ों के कलाकारों ने अपनी शारीरिक क्षमता, साहस और पारंपरिक युद्धकला का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। लेझिम की लयबद्ध प्रस्तुति, बाना-बनेटी के युद्धकौशल और नन्हे बालकों के उत्कृष्ट करतबों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कलाकारों ने कीलों पर लेटकर शारीरिक संतुलन और साहस का प्रदर्शन किया।

 

एक प्रस्तुति में कीलों पर लेटे युवक के शरीर के ऊपर बैलगाड़ी का पहिया रखकर नारियल फोड़ा गया। वहीं, कीलों पर लेटकर सीने पर फर्श तोड़ने और नारियल फोड़ने जैसे जोखिमपूर्ण करतब भी दिखाए गए। आंख की पलक और कान से केबल बांधकर पानी से भरी स्टील की बाल्टी तथा कलसी लटकाने और दांतों से लगभग 40 किलोग्राम वजन उठाने के करतबों ने उपस्थितजनों को अचंभित कर दिया।

 

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार मुकेश दरबार ने श्रीकृष्ण-सुदामा की अटूट मित्रता पर आधारित नृत्य-नाट्य की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के प्रेम, समर्पण, मित्रता और आत्मीयता को दर्शाती इस प्रस्तुति ने दर्शकों के हृदय को छू लिया। धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों को प्रस्तुत करने वाले इस कार्यक्रम को उपस्थितजनों ने सराहा।

मेले में ताप्ती मेला समिति द्वारा विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में तिब्बती परंपरा के पारंपरिक नृत्य का भी आयोजन किया गया। तिब्बती समाज की महिला एवं पुरुष कलाकारों ने अपनी पारंपरिक नृत्य शैली और मनमोहक प्रस्तुति से श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भारत की सांस्कृतिक विविधता और विभिन्न समाजों की परंपराओं को दर्शाती इस प्रस्तुति ने मेले के आकर्षण को और बढ़ाया। श्रद्धालुओं ने कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लेकर उनका उत्साहवर्धन किया।

 

मेले में श्रद्धालुओं ने भगवान बालाजी महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। परिवारों ने मेले में लगी दुकानों, झूलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लिया। पूरे परिसर में भक्ति, उल्लास और उत्सव का वातावरण बना रहा।

 

इस अवसर पर श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि लगभग 450 वर्षों से माँ ताप्ती के तट पर आयोजित हो रहा भगवान बालाजी महाराज का मेला समाज और क्षेत्र की श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास का प्रतीक है। यहां श्रद्धालु केवल परंपरा निभाने नहीं आते, बल्कि भारतीय संस्कृति और सभ्यता को जीवंत स्वरूप में देखने का अवसर भी प्राप्त करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बुरहानपुर के नागरिकों की सहभागिता क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि का प्रमाण है। मेले हमारे मनों को जोड़ते हैं और आपसी मेल-मिलाप को बढ़ावा देते हैं। मेलों की परंपरा ने भारतीय संस्कृति और हमारी गौरवशाली परंपराओं को सदियों से जीवंत बनाए रखा है। माँ ताप्ती के तट पर ईश आराधना और सांस्कृतिक परंपराओं का यह संगम क्षेत्र की विशिष्ट पहचान है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, विभिन्न व्यायामशालाओं के उस्ताद, कलाकार और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि भगवान बालाजी महाराज का यह तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेला 22 से 24 अक्टूबर तक सतियारा घाट पर आयोजित किया जा रहा है। श्रीमती अर्चना चिटनिस के प्रयासों से पिछले 18 वर्षों से श्री बालाजी ताप्ती उत्सव समिति के माध्यम से मेले के आयोजन और व्यवस्थाओं को निरंतर भव्य स्वरूप दिया जा रहा है। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और पारंपरिक शौर्य कलाओं के कारण यह मेला बुरहानपुर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

 

 

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